विकास दुबे और साथियों का एनकाउंटर फर्जी नहीं

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कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के एनकाउंटर पर UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मुठभेड़ फेक नहीं थी। पुलिस ने विकास दुबे समेत उसके गुर्गों को मार गिराए जाने को लेकर कोर्ट में शुक्रवार को विस्तृत जवाब दाखिल किया।

जवाब दाखिल करते हुए UP पुलिस ने कहा कि एनकाउंटर सही थे। उन्हें फेक नहीं कहा जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे और उसके गुर्गों ने 8 पुलिसकर्मियों को बर्बरतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया था। गांव में देर रात तक चले एनकाउंटर में विकास दुबे और उसके कई साथी फरार हो गए थे। इसके बाद यूपी STF ने 8 दिनों के भीतर 5 एनकाउंटर करते हुए कई आरोपियों को ढेर कर दिया था।

कई दिनों तक 5 लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर विकास दुबे को ढूंढने के बाद वह मध्य प्रदेश के उज्जैन से पकड़ा गया था। यूपी STF वहां से दुबे को कानपुर लेकर आ रही थी, तभी अगले दिन सुबह उसका एनकाउंटर हो गया। यूपी एसटीएफ ने दावा किया कि पुलिस की गाड़ी पलटने की वजह से दुबे भागने की कोशिश करने लगा। उसने पुलिस से बंदूक छीन ली और फायरिंग भी की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दुबे को ढेर कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या के आरोपी 11 लोग अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इसके अलावा कुछ और लोगों के बारे में जानकारी मिली है जो कि अप्रत्यक्ष रूप से विकास की मदद कर रहे थे। इन लोगों के बारे में सुराग मिलने पर STF की टीमों ने मंगलवार देर रात एक साथ कई जिलों में छापेमारी की थी। एक दर्जन से अधिक लोगों को उठाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और STF को सूचना मिली थी कि कानपुर देहात, औरैया और झांसी में विकास के कुछ गुर्गे अपने रिश्तेदारों के यहां छिपे हैं। इसके बाद STF ने सभी इलाकों में STF और पुलिस की संयुक्त टीम को सतर्क कर दिया। देर रात लगभग ढाई बजे एक साथ सभी जगहों पर छापेमारी की गई।

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