Top Condom Producer Country

Top Condom Producer Country: थाइलैंड कंडोम बनाने में सबसे आगे क्यों, जंग ने कैसे बढ़ाया इसका संकट?

Top Condom Producer Country: अमेरिका और ईरान की जंग के बीच तेल-गैस के बाद अब कंडोम की चर्चा है. जंग के हालात ऐसे ही रहे तो कंडोम का प्रोडक्शन गिर सकता है. कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. कंडोम के प्रोडक्शन में थाइलैंड सबसे आगे है, लेकिन जंग ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जानिए, थाइलैंड कैसे बना कंडोम के प्रोडक्शन का बादशाह.
ईरान और अमेरिका की जंग के बीच कंडोम भी चर्चा में है. पश्चिम एशिया की टेंशन के कारण कंडोम की कमी बढ़ रही है. अकेले भारत में 8,170 करोड़ रुपए की कंडोम इंडस्ट्री है जो सप्लाई चेन की क्राइसिस से जूझ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत में इसकी कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. यह क्राइसिस समुद्री रास्तों से आने वाले कच्चे माल में कमी होने के कारण बनी है.

कंडोम को बनाने में जिस पेट्रो-केमिकल प्रोडक्ट, सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया का इस्तेमाल होता है उसकी सप्लाई में कमी आई है. अब इनकी कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा है. दावा किया गया है कि आमोनिया की कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. दुनिया के कई देश कंडोम बनाते हैं, लेकिन कुछ इस मामले में सबसे आगे हैं.

कंडोम का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर कौन?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट कहती है, मात्र 6 करोड़ आबादी वाला थाइलैंड कंडोम एक्सपोर्ट करने में सबसे आगे है. वहीं, चीन और अमेरिका वो देश है जो सबसे ज्यादा कंडोम खरीदते हैं. थाइलैंड यूं ही नहीं, कंडोम का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है. इसके पीछे कई कारण हैं. अब सवाल है कि थाइलैंड में ऐसा क्या है कि यह कंडोम का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन गया?

5 वजह, थाइलैंड कैसे बना सबसे बड़ा एक्सपोर्टर?
नेचुरल रबर का गढ़: कंडोम को बनाने में कच्चे माल के तौर पर नेचुरल रबर का इस्तेमाल होता है. इसी नेचुरल रबर के प्रोडक्शन के मामले में थाइलैंड सबसे आगे है. यही वजह है कि थाइलैंड को कच्चा माल हासिल करने में लागत कम पड़ती है.
पेड़ों से निकलने वाले नेचुरल रबर से कंडोम बनाया जाता है.

मैन्युक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: थाइलैंड नेचुरल रबर की ताकत को समझता है, यही वजह है कि इस देश ने लेटेक्स प्रोडक्ट बनाने के लिए बड़े स्तर पर इंडस्ट्री को विकसित किया और प्रोडक्शन को आगे बढ़ाया. यहां हाइटेक मशीनें हैं और बड़े पैमाने पर कंडोम का उत्पादन होता है.
सस्ती मजदूरी: थाइलैंड कंडोम के प्रोडक्शन में इसलिए भी आगे है क्योंकि वहां मजदूरी कम है. श्रमिक आसानी से उपलब्ध हैं और नेचुरल रबर आसानी से मिलने के कारण प्रोडक्ट कम कीमत पर तैयार हो जाता है. नतीजा, यह एक्सपाेर्ट में सबसे आगे है.
सरकार का सपोर्ट: कंडोम मैन्युफैक्चरिंग थाइलैंड की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है. थाइलैंड सरकार ने इसके एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए. सरकार ने टैक्स में छूट के साथ इंडस्ट्रियल जोन बनाया और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया. इससे सीधेतौर पर तौर कंपनियों को फायदा होने के साथ सरकार को भी फायदा होता है.
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा: थाइलैंड में कई बड़ी कंपनियां है. जैसे- थाई निपॉन रबर इंडस्ट्री और ओकोमोटो इंडस्ट्रीज. ये कंपनियों उन सभी अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी स्टैंडर्ड का पालन करती हैं जो यहां के कंडोम के दुनियाभर के देशों में भरोसा पैदा करते हैं. यह भी एक खास वजह है.
थाइलैंड ने लेटेक्स प्रोडक्ट बनाने के लिए बड़े स्तर पर इंडस्ट्री को विकसित किया और प्रोडक्शन को आगे बढ़ाया.

कितने देश थाइलैंड से कंडोम खरीद रहे?
दुनिया के ग्लोबल मार्केट शेयर में थाइलैंड की 44 फीसदी हिस्सेदारी है. 2025 का आंकड़ा कहता है, दुनिया के 176 देश थाइलैंड से कंडोम खरीदते हैं. चीन, अमेरिका और वियतनाम सबसे बड़े आयातक देश हैं. अब मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कच्चे माल का संकट पैदा हो रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कंडोम बनाने वाली एक कंपनी के अधिकारी का कहना है, पीवीसी फॉइल, एल्युमीनियम फॉइल और पैकेजिंग जैसी सामग्रियों की आपूर्ति में कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उत्पादन और ऑर्डर पर असर डाला है.लॉजिस्टिक्स में आई बाधाओं ने इन मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. भारत के कंडोम बाजार की स्थिति और जटिल बन गई है.

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