उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के पालन की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज मंगलवार को निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना दिया. बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने निदेशालय के गेट के सामने नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.
लिस्ट री-विजिट में देरी पर जताई नाराजगी
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं कर रही है. उनका कहना है कि सरकार ने 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान 13 अगस्त 2024 के इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के अनुसार चयन सूची का री-विजिट करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा था.
अब यह समय सीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सूची का पुनरीक्षण नहीं किया गया है. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 21 जुलाई को होनी है. ऐसे में वे किसी भी तरह की देरी या लापरवाही नहीं चाहते और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
अभ्यार्थियों ने तेज किया आंदोलन
अभ्यार्थी विक्रम और अमित मौर्य ने बताया कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के कारण आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए. उन्होंने कहा कि पिछले लगभग छह वर्षों से अभ्यर्थी आरक्षण नियमों के सही पालन और न्याय की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नई चयन सूची तैयार कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था. इसके बावजूद अब तक आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल सका है.
अभ्यर्थी धनंजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने में देरी कर रही है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से अभ्यर्थियों को दोबारा सड़क पर उतरकर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

