युद्ध के लिए ताइवान भी तैयार?

मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे ताइवान ने मंगलवार को आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया और द्वीपीय देश के आसपास चीन के अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास का मुकाबला करने के लिए अपना सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया. चीन का सैन्य अभ्यास पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है. ताइवान ने अपने सैन्य अभ्यास की शुरुआत करते हुए बीजिंग पर पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइपे यात्रा का उपयोग स्व-शासित द्वीप पर आक्रमण की तैयारी के लिए करने का आरोप लगाया है. ताइवान को चीन अपनी एक-चीन नीति के तहत अपना हिस्सा बताता है.

ताइवान की सेना की आठवीं कोर के प्रवक्ता लू वोई-जे ने ताइपे में मीडिया को बताया कि ताइवान की सेना ने कई घंट तक अपने ‘फायरिंग टारगेट फ्लेयर्स’ और तोपखाने से गोले दागे. ताइवान की सेना ने कहा कि अभ्यास बृहस्पतिवार को एक बार फिर होगा जिसमें सैकड़ों सैनिकों और 40 हॉवित्जर की तैनाती शामिल होगी.

चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पूर्वी थिएटर कमान ने घोषणा की कि वह 9 अगस्त को ताइवान द्वीप के आसपास के जल और हवाई क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण आयोजित करना जारी रखे हुए है, जिसमें संयुक्त नाकाबंदी और संयुक्त समर्थन कार्यों पर जोर दिया गया. ताइवान के सैन्य अभ्यास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य में मौजूदा तनाव का मूल कारण यह है कि डीपीपी (सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी) के अधिकारी स्वतंत्रता की चाहत और उकसावे के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं.

‘इतिहास के खिलाफ जाना होगी ताइवान की बड़ी भूल’

उन्होंने कहा, ‘‘हम ताइवान के अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इतिहास की प्रवृत्ति के खिलाफ जाने या सैन्य बल के साथ पुनर्मिलन का विरोध करने का कोई भी प्रयास सभी चीनी लोगों द्वारा अस्वीकार किया जाएगा और व्यर्थ होगा. इस तरह के प्रयासों का विफल होना तय है.’’

पीएलए ने शुरू में ताइवान जलडमरूमध्य में 4-7 अगस्त तक अपनी सेना के सभी हथियारों को शामिल करते हुए अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास की घोषणा की थी, लेकिन यह निर्धारित समय से आगे भी जारी रहा और इसका कोई अंत नहीं दिखता. चीन की आधिकारिक मीडिया की खबरों में कहा गया है कि ताइवान के आसपास अभ्यास जारी रखना एक नयी सामान्य बात होगी.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के चुनावों से पता चलता है कि ताइवान की अधिसंख्यक जनता चीन के साथ किसी भी तरह के एकीकरण का विरोध करती हैं और लोगों का एक बड़ा हिस्सा खुद को ‘ताइवानी’ मानता है, न कि ‘चीनी’. ताइपे में, ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया को अपने संबोधन में आरोप लगाया कि ‘चीन ने अपने सैन्य अभ्यास का इस्तेमाल ताइवान पर आक्रमण की तैयारी के लिए किया है’’ और पेलोसी की यात्रा को बहाने के रूप में इस्तेमाल किया है.

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1