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CAA, अनुच्छेद 370, आरक्षण, कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा देश की दिशा और दशा

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नए साल में भी देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर रहने वाली हैं जहां अहम संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई होनी है। सर्वोच्च अदालत राष्ट्रीय और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व के मामलों पर सुनवाई करेगी। इन मुद्दों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना और आरक्षण का मसला शामिल है। इसके अलावा कृषि कानूनों की वैधानिकता पर भी सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा। साथ ही धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के मामले में भी सुनवाई होगी।

ये ऐसे मामले हैं, जिन पर आने वाला कोर्ट का फैसला देश की दिशा और दशा तय करेगा। CAA और अनुच्छेद 370 राष्ट्रीय मुद्दे हैं। इन दोनों मामलों में सरकार के फैसले पर राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया हुई थी। CAA के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुआ था। CAA को सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई है। कोर्ट याचिकाओँ पर सरकार को नोटिस भी जारी कर चुका है अब मेरिट पर सुनवाई होनी है। CAA में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश से 31 दिसंबर, 2014 तक आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाइयों को नागरिकता देने के नियमों को आसान बनाया गया है। इस कानून को मुस्लिमों विरोधी बताया गया है और उसकी संवैधानिक मान्यता को चुनौती दी गई है। अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में देश का संविधान और कानून लागू हो गए हैं जबकि पहले ऐसा नहीं था। इन दोनों ही अनुच्छेदों के जरिये जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए थे। अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म करने के सरकार के फैसले का कई जगहों पर विरोध हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में बहुत सी याचिकाएं लंबित हैं जिनमें जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के राष्ट्रपति के आदेश को निरस्त करने की मांग है।

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देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को प्रभावित करने वाला एक अहम मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में लंबित है। नौ न्यायाधीशों की पीठ धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के मुद्दे पर विचार कर रही है। इस पर आने वाला फैसला सामाजिक स्तर पर बड़ा प्रभाव डालेगा।

आरक्षण शुरू से देश में एक अहम मुद्दा रहा है और इस पर कोर्ट के बहुत से फैसले आ चुके है। अभी भी सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण का मुद्दा लंबित है। जिसमें आरक्षण की अधिकतम पचास फीसद की सीमा का मुद्दा भी विचारणीय है। कई राज्यों ने इसको पार कर रखा है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दिए जाने वाले 10 फीसद आरक्षण और महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा भी लंबित है।

हाल में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का भी देश भर के किसान बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं। तीनों कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जिस पर इस वर्ष कोर्ट सुनवाई करेगा।

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