क्रिकेट में कुछ लोग सिर्फ कोच नहीं, बल्कि ऐसे हुनरमंद मार्गदर्शक होते हैं जो खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचा देते हैं। भारतीय क्रिकेट में भी कई ऐसे नाम रहे हैं, जिन्होंने अपनी पैनी नजर और सही मार्गदर्शन से साधारण दिखने वाले खिलाड़ियों को स्टार बना दिया। उनकी दूरदर्शिता और मेहनत का नतीजा है कि आज कई क्रिकेटर दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
रमाकांत आचरेकर, दिनेश लाड और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज कोचों की तरह चंद्रकांत पंडित भी युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए जाने जाते हैं। ‘चंदू सर’ के नाम से मशहूर पंडित ने मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम को नई पहचान दिलाई और कई खिलाड़ियों के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में निखरे सारांश जैन इसका ताजा उदाहरण हैं, जिन्हें हाल ही में श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है।
पारखी नजर ने पहचानी काबिलियत
साल 2020 में जब चंद्रकांत पंडित मध्य प्रदेश टीम के हेड कोच बने, तब सारांश जैन अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पहली बार उनकी गेंदबाजी देखने के बाद पंडित उनकी लूप, ड्रिफ्ट, टर्न और सटीकता से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने उसी समय सारांश से कहा था कि वह एक दिन भारत के लिए खेलेंगे। उस वक्त जैन को खुद भी इस बात पर यकीन नहीं था, लेकिन चंद्रकांत पंडित की पैनी नजर ने उनकी प्रतिभा को पहले ही पहचान लिया था।
पलट दी किस्मत
चंद्रकांत पंडित के मार्गदर्शन ने सारांश जैन के करियर को नई दिशा दी। उनकी सलाह पर जैन ने ओवर द विकेट की बजाय राउंड द विकेट गेंदबाजी शुरू की, जिसका असर जल्द ही मैदान पर दिखने लगा। इसके बाद वह मध्य प्रदेश टीम के नियमित सदस्य बन गए। 2021-22 के घरेलू सीजन में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत में भी अहम भूमिका निभाई। जैन ने महत्वपूर्ण मुकाबलों में विकेट लेने के साथ बल्ले से भी योगदान दिया, जबकि मुंबई के खिलाफ फाइनल में उनकी उपयोगी पारी और गेंदबाजी टीम की जीत में निर्णायक साबित हुई।
चंद्रकांत की कोचिंग में छोड़ी छाप
चंद्रकांत पंडित के आने के बाद सारांश जैन के करियर ने नई उड़ान भरी। जहां पहले पांच सीजन में उन्हें केवल आठ मैच खेलने का मौका मिला था, वहीं पंडित की कोचिंग में उन्होंने 33 मुकाबले खेले और खुद को टीम का अहम खिलाड़ी साबित किया। रणजी ट्रॉफी फाइनल में शानदार प्रदर्शन के बाद वह मध्य प्रदेश के नियमित सदस्य बन गए। अब बिना आईपीएल खेले भारतीय टेस्ट टीम में उनका चयन होना उनकी मेहनत और प्रतिभा का बड़ा प्रमाण है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सारांश 54 मैचों में 2,223 रन बनाने के साथ 188 विकेट भी अपने नाम कर चुके हैं।
बना दिया है खास रिकॉर्ड
सारांश जैन का सर्वश्रेष्ठ घरेलू सीजन पिछले रणजी ट्रॉफी में देखने को मिला, जहां उन्होंने सात मैचों में 518 रन बनाने के साथ 30 विकेट भी हासिल किए। इस प्रदर्शन के दम पर वह शार्दुल ठाकुर के बाद पिछले पांच रणजी सीजन में 500 से ज्यादा रन और 30 विकेट का डबल पूरा करने वाले दूसरे खिलाड़ी बने। वहीं, हाल ही में श्रीलंका में खेली गई इंडिया ए सीरीज में भी उन्होंने 75 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और सात विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
पहले टेस्ट मैच में डेब्यू की उम्मीद
सारांश जैन की सबसे बड़ी खासियत उनकी अलग गेंदबाजी शैली है। वह उन चुनिंदा ऑफ स्पिनरों में शामिल हैं जो नियमित रूप से राउंड द विकेट गेंदबाजी करते हैं और जरूरत पड़ने पर दोनों एंगल से प्रभावी साबित होते हैं। वॉशिंगटन सुंदर के पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं होने के कारण टीम में ऑफ स्पिन विकल्प सीमित हैं। ऐसे में श्रीलंका की स्पिन मददगार पिचों पर सारांश के प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। चंद्रकांत पंडित को भी उम्मीद है कि उनका शिष्य पहले टेस्ट में भारत की अंतिम एकादश का हिस्सा होगा।

