नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की एक तस्वीर ने खासा ध्यान खींचा. BRICS बिजनेस फोरम के दौरान दोनों नेता साथ-साथ चलते नजर आए. प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामा और उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लेकर गए. इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी उनके साथ मौजूद थे.
दोनों नेताओं की मुस्कुराती तस्वीर को भारत की मौजूदा कूटनीतिक नीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ओर भारत अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस और ईरान जैसे देशों के साथ भी बातचीत और सहयोग के रास्ते खुले रखे हुए है.
एक तस्वीर में दिखी भारत की कूटनीति
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में नेताओं की यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और तनावों से गुजर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट ने कई देशों के सामने कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ाई हैं. ऐसे माहौल में भारत लगातार सभी प्रमुख पक्षों के साथ बातचीत बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है. मोदी और पेजेशकियान की गर्मजोशी भरी तस्वीर इसी रुख की एक झलक देती है. भारत ईरान और रूस के साथ अपने रिश्तों को बनाए रखने के साथ अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ा रहा है.
पहली भारत यात्रा पर आए हैं पेजेशकियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की यह भारत की पहली यात्रा है. उनका दौरा ऐसे समय हुआ है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव तथा अमेरिका की भूमिका को लेकर पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. ब्रिक्स सम्मेलन ने भारत और ईरान के शीर्ष नेतृत्व को आमने-सामने बातचीत का एक महत्वपूर्ण अवसर दिया. दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग पहले से ही चर्चा का विषय रहा है.
दो हफ्ते से भी कम समय में दूसरी मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान की BRICS के दौरान हुई मुलाकात दोनों नेताओं की हाल की दूसरी बैठक है. दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी बातचीत की. प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के बाद कहा कि पेजेशकियान की भारत यात्रा इसलिए खास है क्योंकि यह उनकी देश की पहली यात्रा है. उन्होंने भारत और ईरान की दोस्ती को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और लंबे समय के लिए दोनों देशों के हित में काम करने की जरूरत बताई.
पश्चिम एशिया संकट पर बातचीत और कूटनीति पर जोर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक रास्ते को समाधान का आधार मानता रहा है. नई दिल्ली का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद जरूरी है. भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को भी एक बड़ी चिंता बताया है. पश्चिम एशिया से तेल और गैस की सप्लाई भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए भारत संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दे रहा है.
मोदी ने सोशल मीडिया पर कही ये बात
मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भारत-ईरान संबंधों को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती को आगे बढ़ाने के लिए लंबे समय की रणनीति और दोनों पक्षों के फायदे वाले सहयोग पर काम करना जरूरी है. मोदी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा का जिक्र किया और कहा कि भारत शांति के अपने रुख पर कायम है. ब्रिक्स मंच पर मोदी-पेजेशकियान की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है. ऐसे में भारत का जोर किसी एक खेमे के बजाय अलग-अलग देशों के साथ संवाद और अपने राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखने पर दिखाई देता है.

