Pakistan Kuwait Defence Deal: दुनियाभर में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच देश अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए नए रक्षा साझेदारी समझौते कर रहे हैं। इसी क्रम में कुवैत ने पाकिस्तान के साथ पांच साल के रक्षा समझौते को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर जून 2023 में हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन अब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते तनाव के बीच इसे आगे बढ़ाया गया है। इससे पहले सऊदी अरब भी पाकिस्तान के साथ रणनीतिक रक्षा समझौता कर चुका है, जिससे दोनों देशों के सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिली है।
GCC के सुरक्षा ढांचे पर असर डालेगा यह रक्षा करार!
सऊदी अरब के बाद अब कुवैत का पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना खाड़ी क्षेत्र की बदलती सुरक्षा रणनीति का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सुरक्षा ढांचे पर भी असर डाल सकता है। वहीं, इसकी टाइमिंग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल एक कूटनीतिक कदम है या फिर खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका की शुरुआत। कुवैत ने हाल ही में आधिकारिक गजट में डिक्री जारी कर पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
कुवैत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह रक्षा समझौता नया नहीं है। इस पर 11 जून 2023 को कुवैत सिटी में हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसे आधिकारिक मंजूरी मिलने में करीब तीन साल लग गए। इस दौरान समझौता केवल दस्तावेजों तक सीमित रहा और लागू नहीं हो सका। अब इसके औपचारिक रूप से लागू होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कुवैत ने इतने लंबे इंतजार के बाद इसे मंजूरी क्यों दी। इसके पीछे क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को अहम वजह माना जा रहा है।
इस रक्षा करार का दायरा काफी बड़ा है। इसमें शामिल है:
•दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे को ट्रेनिंग देंगी
•खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान
•लॉजिस्टिक्स कोऑपरेशन
•डिफेंस टेक्नोलॉजी और रिसर्च में सहयोग
•सैन्य उपकरण निर्माण में साझेदारी
•इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम्स
यह NATO जैसा पारस्परिक रक्षा समझौता नहीं
कुवैत-पाकिस्तान रक्षा समझौता किसी सैन्य गठबंधन की तरह नहीं है, जिसमें एक देश पर हमला होने पर दूसरा सीधे युद्ध में शामिल हो जाए। यह समझौता मुख्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और रक्षा तकनीक सहयोग पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा चिंताओं और ईरान-अमेरिका तनाव के बाद कुवैत ने इस समझौते को आगे बढ़ाने का फैसला किया। क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं ने भी खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा साझेदारियां मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है।
कुवैत- पाक सैन्य अफसरों के बीच हुईं बैठकें
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सुरक्षा हालात के बीच कुवैत अपनी रक्षा रणनीति को अधिक संतुलित बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से वह पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्ति संपन्न और मजबूत सैन्य क्षमता वाले देश के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। समझौते को मंजूरी मिलने से पहले दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई थी। वहीं, इससे पहले सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच भी एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था, जिसने क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को और मजबूत किया।
कुवैत वाला रक्षा समझौता उतना गहरा नहीं
फिलहाल कुवैत और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता सऊदी-पाकिस्तान समझौते जितना व्यापक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पारस्परिक रक्षा की कोई शर्त शामिल नहीं है। इसके बावजूद यह साफ संकेत देता है कि खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत लगातार बढ़ रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अब केवल सैन्य प्रशिक्षण और मानव संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभर रहा है। हालांकि इस समझौते का भारत पर तत्काल कोई सीधा प्रभाव नहीं दिखता, लेकिन खाड़ी देशों और पाकिस्तान के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर रखने की जरूरत जरूर पैदा करता है।
खुद को एक अहम खिलाड़ी के रूप में पेश कर रहा PAK
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सऊदी अरब, UAE समेत कई खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को काफी मजबूत किया है। ऐसे में पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका मजबूत हो सकती है, हालांकि कुवैत-पाकिस्तान रक्षा समझौते पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह समझौता भले ही सऊदी-पाकिस्तान रक्षा करार जितना व्यापक न हो, लेकिन इसकी टाइमिंग और बदलते भू-राजनीतिक हालात खाड़ी क्षेत्र में नए सुरक्षा समीकरणों की ओर इशारा करते हैं।

