रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने की इच्छा जताई है। रूसी पत्रकार पावेल जारुबिन से बातचीत में उन्होंने कहा कि रूस समझौते के लिए तैयार है और मॉस्को तथा वॉशिंगटन त्रिपक्षीय संपर्क दोबारा शुरू करने पर सहमत हुए हैं। पुतिन ने भरोसा जताया कि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ऐसा नहीं होता है, तब भी रूस अपने उद्देश्यों को हासिल करेगा और अपने तथाकथित ‘विशेष सैन्य अभियान’ के सभी लक्ष्य पूरे करेगा।
बातचीत के लिए तैयार हैं पुतिन
अमेरिकी प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत को लेकर पुतिन ने कहा कि रूस त्रिपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने के लिए सहमत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य केवल अस्थायी युद्धविराम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रूस और यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले स्थायी शांति समझौते तक पहुंचना होगा। पुतिन के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रूस बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है।
भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
पुतिन ने आगे बताया कि अमेरिकी प्रशासन के प्रतिनिधि ने रूस और यूक्रेन की भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ पूरे यूरोपीय सुरक्षा ढांचे पर भी बातचीत करने की जरूरत बताई है। रूसी राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव से सहमति जताते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका क्या नतीजा निकलता है।
पुतिन ने हमेशा शांतिपूर्ण समाधान की कही बात
पुतिन ने दावा किया कि रूस शुरू से ही यूक्रेन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान चाहता रहा है, लेकिन यूक्रेन ने हर बार समझौते के प्रयासों को खारिज किया। उन्होंने 2014 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि रूस ने यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में समझौता कराने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बजाय आम नागरिकों के खिलाफ हथियारों और विमानों का इस्तेमाल किया गया। पुतिन ने मिन्स्क समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि रूस उन लोगों के साथ समझौते के पक्ष में था, जिन्होंने यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन का विरोध किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि डोनबास के लोगों की सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले भी रूस ने समझौते का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यूक्रेन ने बातचीत के बजाय लड़ाई जारी रखने का फैसला किया।

