न्यूजीलैंड दौरे पर टीम इंडिया का शानदार प्रदर्शन जारी है। पांच मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम ने 4 विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारत को 181 रनों का लक्ष्य मिला था, लेकिन 112 रन तक टीम के 6 विकेट गिर चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने मोर्चा संभाला और सातवें विकेट के लिए 69 रनों की अहम साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही दोनों बल्लेबाजों ने 17 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
तिलक-नीतीश ने तोड़ा पठान बंधुओं का रिकॉर्ड
टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से सफल रन चेज के दौरान सातवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड पहले इरफान पठान और यूसुफ पठान के नाम था। दोनों ने साल 2009 में श्रीलंका के खिलाफ 59 रनों की साझेदारी की थी। अब तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में नाबाद 69 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी कर इस 17 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इसके साथ ही फुल मेंबर टीमों के बीच टी20 इंटरनेशनल में सफल रन चेज के दौरान सातवें विकेट के लिए यह संयुक्त रूप से दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी भी बन गई है।
T20I में सफल रन चेज में 7वें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी (फुल मेंबर्स)
•आफिफ हुसैन और मोसद्देक हुसैन (बांग्लादेश) – 82 रन बनाम जिम्बाब्वे (साल 2019)
•चामिका करुणारत्ने और दसुन शनाका (श्रीलंका) – 69 रन बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2022)
•तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी (भारत) – 69 रन बनाम न्यूजीलैंड (साल 2026)
•वेन पार्नेल और रस्टी थेरोन (साउथ अफ्रीका) – 64 रन बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2011)
•यूसुफ पठान और इरफान पठान (भारत) – 59 रन बनाम श्रीलंका (साल 2009)
तिलक वर्मा ने हार्दिक को छोड़ा पीछे
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में तिलक वर्मा ने नाबाद 51 रनों की शानदार पारी खेलकर हार्दिक पांड्या को पीछे छोड़ दिया। टी20 इंटरनेशनल में लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद लौटने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सूची में तिलक अब चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। वह अब तक 12 मैचों में नाबाद रहे हैं और इन सभी मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत मिली है। वहीं, हार्दिक पांड्या 11 मैचों में नाबाद रहे, जिनमें से भारत ने 10 मैच जीते। इस सूची में एमएस धोनी शीर्ष पर हैं, जो 20 टी20 इंटरनेशनल मैचों में लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद लौटे थे। इनमें भारतीय टीम को 15 मुकाबलों में जीत मिली थी।

