लॉकडाउन के अवधि की स्कूल फीस नहीं ले सकेंगे प्राइवेट स्कूल? कोर्ट ने किया नोटिस जारी

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लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की फीस माफ कराने और प्रदेश में भौतिक रूप से कक्षाएं शुरू होने तक किसी भी तरह की परीक्षा कराए बगैर कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने ‘मासूम बचपन फाउंडेशन’ नाम के एक ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर 17 नवंबर को यह नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों के संपर्क में बच्चों के लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य संबंधी नुकसान का मुद्दा भी उठाया है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि इलेक्ट्रानिक उपकरणों से बच्चों में तनाव का स्तर बढ़ रहा है और उनकी तार्किक सोच, यादाश्त, मूड और मानसिक स्थिरता बुरी तरह से प्रभावित हो रही है, इसलिए कई शिक्षाविदों ने शून्य परीक्षा व्यवस्था का सुझाव दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता ने अदालत से शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को बगैर परीक्षा के अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाए।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, लॉकडाउन की अवधि के दौरान कोई भी शैक्षणिक संस्थान खुला नहीं था, इसलिए उस अवधि के लिए विद्यार्थियों से कोई फीस नहीं वसूली जा सकती। ऐसे कई उदाहरण दिए गए हैं जहां कुछ शैक्षणिक संस्थानों द्वारा फीस मांगी गई है। याचिकाकर्ता ने गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के खातों का नियमन किए जाने की भी मांग की जिसमें विद्यार्थियों की फीस और अध्यापकों का वेतन शामिल है।अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार दिसंबर निर्धारित की।

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