संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि अहम प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान जिला प्रशासन रैली, जुलूस और जनसभाओं की अनुमति न दे। इसका उद्देश्य यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना और परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की बाहरी परेशानी से बचाना है। समिति ने परीक्षा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम पहले से करने पर भी जोर दिया है।
राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने से जुड़ी रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट NEET प्रश्नपत्र लीक विवाद और NTA के कामकाज में कथित प्रशासनिक खामियों के बाद आई है।
रैलियों, जुलूसों से परीक्षार्थियों को पहुंचने में हो सकती है देरी
NEET प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी इस्तीफा देना पड़ा था। अब संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा के दिन रैली, जुलूस या बड़ी सभाओं के कारण छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में देरी हो सकती है। इससे वे निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने की सिफारिश की है। इसके तहत जिला प्रशासन को परीक्षा वाले दिन किसी भी रैली, जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं देने का निर्देश देने की बात कही गई है। समिति ने यातायात सुचारू रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम करने पर भी जोर दिया है, ताकि परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की टाली जा सकने वाली परेशानी का सामना न करना पड़े।
पूरे साल की मेहनत हो जाती है बेकार
अब तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) छात्रों को सलाह देती रही है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचें। साथ ही, परीक्षा के दिन किसी रैली या अन्य आयोजन के चलते होने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। वहीं, संसदीय समिति ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी खामियों पर चिंता जताई है। समिति के अनुसार, कई बार कुछ मिनट की देरी से परीक्षा केंद्र पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाता। ऐसे में उनकी पूरे साल की तैयारी और मेहनत पर पानी फिर जाता है।
बचे हुए समय में परीक्षा देने की हो अनुमति
रिपोर्ट में संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले छात्रों के लिए भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। समिति के मुताबिक, ऐसे परीक्षार्थियों से देरी की वजह बताते हुए लिखित वचनपत्र लिया जा सकता है, जिसके बाद उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश देने पर विचार किया जाए। हालांकि, उन्हें केवल निर्धारित समय में से बचे हुए समय तक ही परीक्षा देने की अनुमति मिले। समिति ने स्पष्ट किया है कि देर से पहुंचने वाले किसी भी छात्र को अतिरिक्त समय नहीं दिया जाना चाहिए।
15 मिनट का अलग समय निर्धारित किया जाए
संसदीय समिति ने परीक्षा के दौरान होने वाली औपचारिकताओं को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने और जांच से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करने के दौरान छात्रों का ध्यान भटक सकता है। खासकर उन परीक्षार्थियों को परेशानी होती है, जो पहले से ही समय के दबाव में सवाल हल कर रहे होते हैं। इसे देखते हुए समिति ने सुझाव दिया है कि इन औपचारिकताओं के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद 15 मिनट का अलग समय तय किया जाए। साथ ही, परीक्षा की निर्धारित अवधि के दौरान ऐसी प्रक्रियाएं पूरी करने से बचा जाए, ताकि छात्रों को बिना किसी व्यवधान के परीक्षा देने का मौका मिल सके।

