OPS की बहाली पर केंद्र का रुख साफ, सरकारी कर्मचारियों को झटका: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार से झटका लगा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल OPS को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना से पड़ने वाले वित्तीय बोझ को लंबे समय तक वहन करना सरकार के लिए मुश्किल है।
केंद्र सरकार का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने से सरकारी खजाने पर लंबे समय तक भारी वित्तीय दबाव पड़ सकता है। इसलिए केंद्र स्तर पर OPS लागू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि, राज्यों को अपने स्तर पर पेंशन व्यवस्था तय करने का अधिकार है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने NPS से OPS में लौटने की जानकारी केंद्र और PFRDA को दी है।
NPS का पैसा वापस करना आसान नहीं
सरकार के अनुसार, मौजूदा नियमों में NPS के तहत कर्मचारी और सरकार द्वारा जमा किए गए योगदान के साथ अर्जित रिटर्न को वापस लेकर राज्य सरकार को लौटाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में NPS से OPS में वापसी केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि कई वित्तीय और कानूनी अड़चनों से जुड़ा मामला भी है।
केंद्र ने शुरू की UPS की व्यवस्था
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से NPS के विकल्प के रूप में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की है। इसका मकसद सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक निश्चित पेंशन देना है। UPS के तहत पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 10,000 रुपये मासिक सुनिश्चित भुगतान का प्रावधान है। इस योजना में कर्मचारी और सरकार दोनों का नियमित योगदान शामिल है।
NPS में कितना पैसा जमा है?
सरकार के मुताबिक, 7 जुलाई तक केंद्रीय कर्मचारियों के NPS के तहत करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मैनेजमेंट में थी। सरकार ने पेंशन व्यवस्था में बदलाव के दौरान वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं, CAG ने भी राज्यों के OPS में लौटने से पड़ने वाले आर्थिक असर पर चिंता जताई है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल OPS की बहाली की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

