वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय खिलौना उद्योग के सामने तेज़ी से आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है। उन्होंने खिलौना निर्माताओं से अपील की कि वे वैश्विक खिलौना बाज़ार में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य तय करें। सीतारमण ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। अनुमान के अनुसार, वर्ष 2032 तक वैश्विक खिलौना बाज़ार का आकार बढ़कर 179 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खिलौना प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय खिलौना उद्योग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस समय 153 देशों को खिलौनों का निर्यात कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में खिलौनों का निर्यात बढ़कर 18.6 करोड़ डॉलर पहुंच गया, जबकि 2019-20 की तुलना में 2025-26 के दौरान खिलौनों के आयात में 71 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2034 तक भारतीय खिलौना बाजार का आकार पांच अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, वहीं वैश्विक खिलौना बाजार 2032 तक 179 अरब डॉलर का हो सकता है।
हमें ऊंचे लक्ष्य रखना चाहिए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को केवल 2034 तक पांच अरब डॉलर के घरेलू खिलौना बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े लक्ष्य तय करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 2032 तक दुनिया का खिलौना बाजार 179 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचता है, तो भारत को उसमें कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उनके अनुसार, देश में क्षमता की कोई कमी नहीं है और भारतीय खिलौना उद्योग इससे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
सीतारमण ने यह भी कहा कि एक समय भारत में खिलौनों का आयात मुख्य रूप से एक ही देश से होता था। वहां से बड़ी संख्या में सस्ते खिलौने आते थे, जिनमें से कई सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते थे और बच्चों के लिए सुरक्षित भी नहीं माने जाते थे।
ब्रांड निर्माण पर भी ध्यान देने की जरूरत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खिलौना उद्योग से केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मजबूत ब्रांड तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी उत्पाद की असली पहचान उसकी ब्रांड वैल्यू होती है। उपभोक्ताओं का भरोसा तभी बनता है, जब वे बिना किसी हिचकिचाहट के किसी ब्रांड का उत्पाद खरीदने के लिए तैयार हों। इस दौरान उन्होंने फ्रांस की खेल सामग्री निर्माता कंपनी डेकाथलॉन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी सफलता के पीछे गुणवत्ता और प्रभावी ब्रांडिंग सबसे बड़ी वजह है।
सीतारमण ने बताया कि सरकार घरेलू खिलौना उद्योग को मजबूत बनाने और चीन समेत अन्य देशों से आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई अहम कदम उठा चुकी है। इनमें खिलौनों के लिए अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण मानक लागू करना और आयात शुल्क को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की एसएफयूआरटीआई योजना का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज से दिल्ली में खिलौना निर्माण के लिए एक उपयुक्त क्लस्टर की पहचान करने का सुझाव भी दिया।
