Neem Karoli Baba: इन दिनों नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की काफी चर्चा हो रही है। इस फिल्म को देखने के बाद दर्शकों के मन में बाबा के प्रति भक्ति का एक नया भाव जागा है, जिससे लोग उनके जीवन और चमत्कारों के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते हैं। बाबा नीम करौली से जुड़ा एक ऐसा सवाल है, जो हर श्रद्धालु के मन में आता है कि आखिर बाबा अपनी ज्यादातर तस्वीरों में कंबल ओढ़े ही क्यों नजर आते हैं? कहा जाता है कि मौसम चाहे कैसा भी हो बाबा हमेशा अपने पास एक साधारण सा कंबल जरूर रखते थे। अमेरिकी लेखक और बाबा के भक्त रिचर्ड अल्बर्ट जो अब रामदास के नाम से लोकप्रिय हैं उन्होंने 1979 में बाबा के चमत्कारों पर ‘मिरेकल ऑफ लव’ नाम से एक किताब लिखी थी। जिसमें उन्होंने एक घटना के बारे में बताते हुए बाबा के ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ का जिक्र किया था। चलिए जानते हैं इस कंबल का क्या रहस्य है।
बाबा के कंबल का रहस्य?
नीम करौली बाबा के कंबल से जुड़ी कई मान्यताएं और कहानियां प्रचलित हैं। कहते हैं बाबा बीमार लोगों पर कंबल डालते थे जिससे उनकी तकलीफें दूर हो जाती थीं। वहीं कई श्रद्धालु ऐसा भी दावा करते हैं कि बाबा कंबल का प्रयोग अपनी शक्तियों को छिपाने के लिए करते थे। वहीं अमेरीकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एलपर्ट यानी राम दास जी ने अपनी पुस्तक Miracle of Love में बाबा के ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि नीम करोली बाबा हमेशा कंबल ओढ़ते थे, इसलिए आज भी लोग कैंची धाम में कंबल चढ़ाते हैं। नीम करोली बाबा नीले या हल्के रंग का कंबल धारण करते थे। कई श्रद्धालु नीले या हल्के रंग के इस कंबल को शांति और आध्यात्मिक स्थिरता से भी जोड़कर देखते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि बाबा की ज्यादातर तस्वीरें कंबल वाली ही वायरल हुई हैं जिसके कारण से कैंची धाम आने वाले लोगों ने यहां कंबल चढ़ाना शुरू कर दिया।
नीम करौली बाबा के कंबल से जुड़ी रहस्यमयी कहानी
बाबा नीम करौली के कंबल से जुड़ी एक कहानी काफी ज्यादा प्रचलित है। कहते हैं एक बुजुर्ग दंपत्ति बाबा के बड़े भक्त थे जो फतेहगढ़ में रहा करते थे। यह घटना 1943 की बताई जाती है जब एक दिन अचानक बाबा उनके घर पहुंचे और कहने लगे वे रात में यहीं रुकेंगे। यह सुन दोनों बेहद खुश हुए और उन्होंने बाबा की खूब सेवा की। भोजन करके बाबा एक कंबल ओड़कर चारपाई पर लेट गए। इसके बाद दोनों बुजुर्ग दंपत्ति भी सोने के लिए चले गए। लेकिन वो सो नहीं पाए क्योंकि दूसरे कमरे में बाबा जी कंबल ओढ़कर रातभर कराहते रहे। दोनों पति-पत्नी बाबा की चारपाई के पास ही बैठे गए और सोचने लगे कि बाबा के साथ क्या हो रहा है।
ऐसा लग रहा था कि जैसे बाबा को कोई मार रहा है। जब सुबह हुई तो महाराज उठे और कंबल को लपेटकर बजुर्ग दंपत्ति को देते हुए कहा इस कंबल को पानी में प्रवाहित कर दें। जाते हुए बाबा ने कहा कि परेशान मत होना महीने भर में आपका बेटा लौट आएगा। दोनों दंपत्ति ने बाबा की आज्ञा का पालन करते हुए कंबल को पानी में बहा दिया। लगभग एक माह के बाद बुजुर्ग दंपत्ति का पुत्र लौट आया। वह एक सैनिक था जो युद्ध में शामिल हुआ था। पुत्र को युद्ध से सही सलामत आते देख बुजुर्ग दंपत्ति खुश हो गए। लेकिन उनके पुत्र ने घर आकर कुछ ऐसी कहानी बताई जिससे दोनों के होश उड़ गए। उन्होंने बताया कि करीब महीने भर पहले ही दुश्मनों ने उसे घेर लिया था। रातभर गोलीबारी हुई जिसमें उसके सारे साथी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया। लड़का ये सोच बेहद हैरान था कि उस गोलीबारी में उसे एक भी गोली नहीं लगी।
कहते हैं यह घटना उस लड़के के साथ उसी दिन हुई जिस रात नीम करोली बाबा जी उस बुजुर्ग दंपत्ति के घर रुके थे। ऐसी मान्यता है कि नीम करौली बाबा ने लड़के पर आने वाला संकट खुद पर ले लिया, जिससे गोलियां लड़के का बाल भी बांका नहीं कर सकीं। कहते हैं इस घटना के बाद से बाबा का कंबल ओर भी ज्यादा प्रसिद्ध हो गया। हालांकि इस कहानी का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलता है। लेकिन ये कहानी भक्तों के बीच काफी प्रचलित है। कहते हैं इसी कहानी के प्रचलित होने के बाद से कैंची धाम में भक्तों ने कंबल चढ़ाना शुरू कर दिया।

