ghatasthapana muhurat

कल से नवरात्रि शुरू,जानिए क्या है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

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नवरात्रि पर्व के शुभारंभ शनिवार से यानी कल से 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत हो जाएगी। इस पर्व में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है जिसका अर्थ है Kalash Sthapana । Navratri के पहले दिन ही Kalash Sthapana की जाती है और अगर ये कार्य तय शुभ मुहूर्त में हो तो अधिक उत्तम रहता है। तो चलिए बताते हैं आपको कि क्या है इस बार Navratri में Kalash Sthapana का शुभ मुहूर्त और साथ ही जानिए कैसे करें मां को प्रसन्न ताकि हर मुराद हो सके पूरी।

घटस्थापना का महत्व

नवरात्रि में घटस्थापना व कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। जो इस पर्व के पहले दिन ही होती है। कलश पर मौली बांधते हुए इस पर आम के पत्ते रखे जाते हैं और फिर 9 दिनों तक मा के साथ साथ इस कलश की भी पूजा होती है। जब भी कलश स्थापना करें तो भगवान गणेश और मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की उपासना ज़रुर करें।

शुभ मुहूर्त-
इस बार Navratri पर्व का शुभारंभ 17 से हो रहा है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और फिर घटस्थापना की तैयारी करे।

शुभ मुहूर्त है – सुबह 6:10 मिनट से 10:11 मिनट तक

यानि इस बार आपके पास Kalash Sthapana के लिए काफी समय है। वहीं अगर आप अभिजीत मुहूर्त में Kalash Sthapana करना चाहते हैं तो शनिवार को सुबह 11: 43 मिनट से लेकर 12:28 मिनट तक ये शुभ मुहूर्त रहेगा। इस मुहूर्त में Kalash Sthapana का विशेष महत्व माना गया है।

घटस्थापना विधि-

नवरात्रि के मौके पर Kalash Sthapana करने से पहले कुछ सामग्री की आवश्यक्ता पड़ती है। जैसे ,मिट्टी का कलश ,जौ,मिट्टी,आम के पत्ते,गंगाजल ,जटा नारियल,अक्षत ,-माता की लाल चुनरी,फूल और श्रृंगार का सामान।


इस दिन सुबह सवेरे उठकर स्नान करें और फिर सभी सामान उचित जगह रख दें। तय शुभ मुहूर्त में सबसे पहले घटस्थापना वाले स्थान को गंगा जल छिड़के और उसे पवित्र करें। जमीन पर साफ मिट्टी बिछा दें, और वहां जौ बोए, इन जौ के ऊपर मिट्टी की एक परत और बिछाए और उस मिट्टी के ऊपर कलश की स्थापना कर दें। याद रहे कि ये कलश साफ जल से भरा होना चाहिए जिसमें गंगाजल भी मिला दें। कलश को कलावे से बांधें और कलश में आम के 8 पत्ते लगाएं। इसके बाद देवी मां का ध्यान करें। इस दौरान इन मंत्रों का जाप करना चाहिए ।


ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्राह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे, अमुकनामसम्वत्सरे
आश्विनशुक्लप्रतिपदे अमुकवासरे प्रारभमाणे नवरात्रपर्वणि एतासु नवतिथिषु
अखिलपापक्षयपूर्वक-श्रुति-स्मृत्युक्त-पुण्यसमवेत-सर्वसुखोपलब्धये संयमादिनियमान् दृढ़ं पालयन् अमुकगोत्रः
अमुकनामाहं भगवत्याः दुर्गायाः प्रसादाय व्रतं विधास्ये।
पहले दिन शैलपुत्री माता की पूजा-

आप जानते ही होंगे कि Navratri के 9 दिनो में देवी दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा की जाती है। और शुरुआत होती है माता पार्वती के पहले रूप शैलपुत्री माता की उपासना से। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ही इस देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। पहले दिन इन्हीं की पूजा अर्चना की जाती है।

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