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हिरोशिमा पर गिरे परमाणु बम से 33 गुना ताकतवर है रूस की ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइल, क्या भारत के पास है?

रूस की ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइल जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को गिराए गए फैट मैन बम (Fat Man Bomb) से 33 गुना ज्यादा न्यूक्लियर पेलोड कैरी कर सकती है. रूस जब किंजल मिसाइल का परीक्षण कर रहा था तो इसे एक गेम चेंजर बताया गया था.

ध्वनि की गति से 10 गुना तेज रफ्तार, किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से मात दे सकने में सक्षम है हाइपरसोनिक मिसाइल ‘किंजल’ (Kinzhal Hypersonic Missiles), रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध (Ukraine-Russia War) में जिसके पहली बार इस्तेमाल की बात स्वीकार की है. रूस का कहना है कि उसने पश्चिमी यूक्रेन में मौजूद हथियारों के जखीरे को नष्ट करने के लिए इस मिसाइल का उपयोग किया.

आपको बता दें कि रूस की ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइल जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को गिराए गए फैट मैन बम (Fat Man Bomb) से 33 गुना ज्यादा न्यूक्लियर पेलोड कैरी कर सकती है. रूस जब किंजल मिसाइल का परीक्षण कर रहा था तो इसे एक गेम चेंजर बताया गया था.

किंजल हाइपरसोनिक मिसाइल के बारे में जानें कुछ तथ्य

  1. किंजल हवा से लॉन्च होनी वाली एक हाइपरसोनिक मिसाइल है. इसकी रेंज 1500 से 2000 किमी बताई जाती है. यह अपने साथ 480 किलो न्यूक्लियर पेलोड कैरी कर सकती है. किंजल मिसाइल की रफ्तार ध्वनि की गति से 10 गुना तेज है, जो लॉन्च होने के बाद आंखों से दिखाई नहीं देती.
  2. किंजल का हिंदी में मतलब होता है ‘कटार’ जिसे अंग्रेजी में ‘डैगर’ कहते हैं. बताया जाता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने मार्च 2018 में किंजल मिसाइल का अनावरण किया था. विशेषज्ञों का दावा है कि किंजल का कॉन्सेप्ट इस्कांदेर-एम जैसी जमीन से लॉन्च होने वाली छोटी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से लिया गया है.
  3. लॉन्च होने के बाद किंजल 4900 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड पकड़ती है. इसकी रफ्तार बढ़कर 12,350 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसा कहा जाता है कि किंजल मिसाइल की हमला करने की क्षमता बेहद खतरनाक है. यह बहुत गहराई तक वार कर सकती है.
  4. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किंजल हाइपरसोनिक मिसाइल को एक आदर्श हथियार बताते हैं. कम ऊंचाई पर बहुत तेज गति से उड़ान भरने के कारण यह मिसाइल किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता रखती है.
  5. रूस हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की दौड़ में सबसे आगे है, इसके बाद चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका का नंबर है. कई अन्य देश इस प्रौद्योगिकी को विकसित करने पर काम कर रहे हैं.
  6. किंजल मिसाइल को कालिनीग्राद में डिप्लॉय किया गया था. यह पोलैंड और लिथुआनिया की सीमा से लगा बाल्टिक सागर का इलाका है. यह फरवरी की बात है जब रूस यूक्रेन के नजदीक अपनी सेना की तैनाती कर रहा था. विशेषज्ञों में मतभेद है कि रूस ने यूक्रेन पर इस मिसाइल से हमला किया है. हालांकि, रूस ने खुद किंजल मिसाइल लॉन्च करने का दावा किया है.

हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नॉलॉजी में भारत अभी कहां खड़ा है?
भारत कुछ वर्षों से हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नॉलॉजी पर काम कर रहा है और वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन से पीछे चल रहा है. सितंबर 2020 में, DRDO ने एक हाइपरसोनिक टेक्नॉलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटेड व्हीकल (HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया और अपनी हाइपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट तकनीक का प्रदर्शन किया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने अपना क्रायोजेनिक इंजन विकसित किया है और 23 सेकेंड की उड़ान में इसका परीक्षण किया है. अब HSTDV का उपयोग करते हुए, भारत एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने का प्रयास करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले भी वैज्ञानिकों को हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नॉलॉजी विकसित करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित कर चुके हैं.

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