Kharmas 2020: 15 दिसंबर से शुरू हो रहा है खरमास, पहले ही निपटा लें मांगलिक कार्य

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खरमास का आरंभ तब होता है जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में विराजते हैं। यह पौष मास कहलाता है। इस माह में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य, विवाह आदि जैसे कार्य या संस्कार नहीं किए जाते हैं। हालांकि, इस दौरान अगर तीर्थ यात्रा की जाए तो सबसे बेहतर होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस महीने खरमास 15 दिसंबर 2020 शुरू होगा। इसी दिन से सूर्य का धनु राशि में प्रवेश होगा। जैसे ही सूर्य का धनु राशि में गोचर होता है वैसे ही खरमास लग जाएगा। ऐसे में खरमास शुरू होने से पहले अपने सभी जरूरी काम निपटा लें। इस दिन के पीछे एक पौराणिक कथा है जिसकी जानकारी हम यहां दे रहे हैं।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सूर्य देव अपने वाहन यानी सात घोड़ों के सहारे ही सृष्टि की यात्रा करते हैं। सूर्य को एक क्षण के लिए भी परिक्रमा के दौरान रुकने और धीमा होने का अधिकार नहीं है। लेकिन अनवरत यात्रा के कारण सूर्य के सातों घोडे़ हेमंत ऋतु में थककर एक तालाब के किनारे रुक जाते हैं। क्योंकि वे पानी पीना चाहते थे। यह देख सूर्य देव को याद आता है कि सूर्य का क्या दायित्व है। उन्होंने सोचा की वो नहीं रुक सकते हैं भले ही घोड़ा थककर रुक जाएं।

यात्रा में कोई रुकावट न आए और सृष्टि पर किसी तरह का कोई संकट न आए इसलिए सूर्य देव ने भास्कर तालाब के पास खड़े दो गधों को रथ में जोतकर यात्रा को जारी रखते हैं। अब गधों की चाल काफी धीरे थी ऐसे में वो अपनी मंद गति से पूरे पौष माह में यात्रा करते रहे। यही कारण है कि सूर्य का तेज बहुत कमजोर हो जाता है। फिर मकर संक्रांति के दिन जब दोबारा सूर्यदेव अपने घोड़ों को रथ में जोतते हैं तब वो अपनी रफ्तार दोबारा पकड़ लेते हैं। इसके बाद से ही धरती पर सूर्य का प्रकाश तेजोमय हो जाता है।

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मकर संक्रांति के दिन खरमास का समापन हो जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2021 को मनाया जाएगा। इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। इस दिन से दोबारा मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

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