संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत इस साल 3 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और संतान के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।
जितिया की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इसे पहले से तैयार कर लेना बेहतर रहता है। पूजा के लिए चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश या लोटा, जल, अक्षत, रोली, सिंदूर, चंदन, हल्दी, दूर्वा और पूजा के फूल रखे जाते हैं।
इसके अलावा कुशा, दीपक, घी या तेल, धूप, अगरबत्ती और कपूर की भी जरूरत होती है। पूजा में पान, सुपारी, मौली, लौंग, इलायची और लाल या पीले रंग का जिउतिया धागा भी रखा जाता है।
भोग के लिए केले, नारियल और दूसरे मौसमी फल के साथ मिठाई, बताशे और भीगे हुए चने रखे जा सकते हैं। कई जगहों पर पंचामृत और स्थानीय परंपरा के अनुसार दूसरी सामग्री भी शामिल की जाती है।
ध्यान रखें कि पूजा की सामग्री और विधि क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर की परंपरा के मुताबिक सामग्री जरूर जांच लें।

