Jharkhand Students Protest: पहली नजर में झारखंड का छात्र आंदोलन और दिल्ली के जंतर-मंतर का प्रदर्शन समान दिख सकते हैं, लेकिन दोनों के मुद्दे अलग हैं। जंतर-मंतर का आंदोलन देशभर में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर केंद्रित था। वहीं, झारखंड में छात्र JPSC, JSSC-CGL समेत राज्य की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, CBI जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्र आरोप लगा रहे हैं कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं के दौरान हर साल पेपर लीक और भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आती हैं। JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब 14वें दिन में पहुंच चुका है और इसकी गूंज धीरे-धीरे राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई देने लगी है।
झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच वार्ता को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हेमंत सोरेन सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसका कहना है कि केवल छात्र प्रतिनिधियों से ही चर्चा होगी। वहीं, आंदोलनकारी छात्र 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता चाहते हैं, जिसमें एक पत्रकार और एक अधिवक्ता को भी शामिल करने की मांग की गई है।
क्या यह Gen-Z का आंदोलन है?
रांची के छात्र आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं, लेकिन इसे पूरी तरह Gen-Z आंदोलन कहना उचित नहीं होगा। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में जहां अधिकांश प्रतिभागी 14 से 29 वर्ष आयु वर्ग के थे, वहीं रांची में कई अभ्यर्थी 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, जो लंबे समय से JPSC और JSSC जैसी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
जंतर-मंतर और झारखंड छात्र आंदोलन में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
JPSC, JSSC-CGL समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, मामलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, राज्य की भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग उठाई जा रही है।
जंतर-मंतर छात्र आंदोलन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन मुख्य रूप से NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में केंद्रित था। देशभर से आए हजारों छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कई विपक्षी नेताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।
झारखंड आंदोलन ने कैसे पकड़ी रफ्तार?
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है। झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। आंदोलन को उस समय नई गति मिली, जब छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे। बाद में सोनम वांगचुक की अपील पर उन्होंने पानी पीना स्वीकार किया, लेकिन आंदोलन जारी रखा। फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं।
छात्रों की 4 प्रमुख मांगें
1.JPSC की 14वीं PT परीक्षा रद्द की जाए
छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि कथित अनियमितताओं के कारण 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा को रद्द किया जाए। उनका कहना है कि यदि परीक्षा निष्पक्ष नहीं हुई है तो इसे दोबारा कराया जाना चाहिए।
2.पूरे मामले की CBI से जांच
राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन छात्र इस पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
3.भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पेपर लीक, कथित धांधली और चयन प्रक्रिया पर सवाल न उठें। उनका कहना है कि पूरी भर्ती प्रणाली में सुधार जरूरी है।
4.दोषियों पर सख्त कार्रवाई
छात्रों की मांग है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सरकार का क्या रुख है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और बातचीत के माध्यम से समाधान चाहती है। हालांकि, वार्ता की प्रक्रिया और प्रतिनिधिमंडल के स्वरूप को लेकर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।
वार्ता को लेकर विवाद क्यों?
वार्ता को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर कायम हैं। सरकार का कहना है कि बातचीत केवल छात्र प्रतिनिधियों के साथ ही होगी, जबकि आंदोलनकारी 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में एक पत्रकार और एक अधिवक्ता को भी शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसी मतभेद के कारण अब तक वार्ता किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
सीआईडी जांच पर सवाल क्यों?
सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए मामले की पड़ताल CBI या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
सीट बेचने के भी आरोप
आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पैसों के बदले चयन किया गया और कुछ अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। फिलहाल यह आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच की मांग पर केंद्रित है, जिसे विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
जमकर हो रही राजनीति
झारखंड का छात्र आंदोलन अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। कांग्रेस सांसद ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष ने भी छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखने का भरोसा दिया।
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
इस मुद्दे पर बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार के साथ कांग्रेस को भी घेरा है। बीजेपी सांसद ने कहा कि झारखंड के छात्रों की समस्याएं भी उतनी ही अहम हैं और विपक्ष को उन पर भी समान गंभीरता दिखानी चाहिए। वहीं, JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में उभर चुका है।

