फालता से जहांगीर खान को राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, उन्हें सोमवार सुबह नेपाल सीमा से सटे इलाके से पकड़ा गया। लंबे समय से फरार चल रहे तृणमूल कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की जांच जारी है।
जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद से तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान फरार चल रहे थे और सुरक्षा एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी थीं। लंबे समय तक खोजबीन के बाद एसटीएफ ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान भी जहांगीर खान विवादों में रहे थे। उन पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को प्रभावित करने तथा मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम शामिल कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
लोगो को धमकाने का भी आरोप
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी जहांगीर खान के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला था और उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप उठाए थे। चुनाव से पहले क्षेत्र में मतदाताओं को धमकाने और दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उतर प्रदेश के चर्चित मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त कर डुंडी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में तैनात किया था।
EVM मशीन पर चिपकाए गए टेप
फालता विधानसभा उपचुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया को लेकर कई विवाद सामने आए थे। मतदान के बीच कुछ ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप लगाए जाने का मामला चर्चा में रहा, जिसका आरोप जहांगीर खान पर लगा था। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए फालता सीट पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया था।
बंगाल में TMC के हार के बाद फरार था जहांगीर
पश्चिम बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। 21 मई तक उनका कोई पता नहीं चल पा रहा था और वे लगातार फरार बताए जा रहे थे। चुनाव से दो दिन पहले उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी, जिसके बाद से ही वे जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर थे।
नेपाल के रास्ते विदेश भागने के फिराक में
जहांगीर खान ने अदालत से सुरक्षा की मांग की थी, परन्तु राज्य सरकार ने उस सुरक्षा को समाप्त करने की अपील की थी। इस बीच खबरें सामने आईं कि उन्होंने नेपाल के रास्ते देश छोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। वहीं, बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई टीएमसी नेताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है। विभिन्न मामलों की जांच के आधार पर पुलिस कई नेताओं को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाते हुए इस्तीफा भी दे दिया है।
