Indian Workers Deaths In Gulf: बेहतर रोजगार, ज्यादा आय और परिवार के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों में कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं में औसतन हर सप्ताह तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो रही है, जिससे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्यों हो रही हैं इतनी मौतें?
खाड़ी देशों में 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ब्लू-कॉलर नौकरियों से जुड़ी हुई है। अधिकांश भारतीय निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, तेल-गैस, परिवहन और रखरखाव जैसे जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करते हैं, जहां ऊंचाई पर कार्य करना और भारी मशीनों का संचालन दुर्घटनाओं के खतरे को बढ़ा देता है।
खाड़ी देशों में गर्मियों के दौरान तापमान 45-50°C तक पहुंच जाता है। हालांकि मिड-डे वर्क बैन लागू है, फिर भी लंबे समय तक बाहर रहने से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकावट से मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है।
सऊदी अरब के नेओम (NEOM) सिटी से लेकर यूएई, कतर और ओमान में चल रही विशाल निर्माण परियोजनाओं के कारण काम का भारी दबाव है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियां तो सुरक्षा नियमों का पालन करती हैं, लेकिन छोटे ठेकेदार और सब-कॉन्ट्रैक्टर अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं।
जोखिम के बावजूद क्यों खाड़ी देशों का रुख करते हैं भारतीय?
विकल्पों और आर्थिक परिस्थितियों के कारण भारतीय मजदूर इन खतरों को उठाने के लिए मजबूर हैं। प्रवासन की मुख्य वजहें:
खाड़ी देशों में रोजगार के अवसर भारतीय श्रमिकों को आकर्षित करते हैं, क्योंकि यहां अपेक्षाकृत कम कौशल वाले कामों में भी भारत की तुलना में बेहतर वेतन मिलता है। यही वजह है कि भारत में 20 से 30 हजार रुपये मासिक कमाने वाला व्यक्ति खाड़ी देशों में काम कर दो से तीन गुना अधिक आय अर्जित कर लेता है।
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है, जिसमें खाड़ी देशों का बड़ा योगदान है। इस कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर निर्माण और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
विदेश जाने के लिए कई मजदूर भारी ब्याज पर कर्ज लेकर एजेंटों को फीस देते हैं। अनुबंध पूरा किए बिना वापस लौटने पर कर्ज में डूबने का डर उन्हें विषम परिस्थितियों में भी काम करने पर मजबूर करता है।
विदेश में मौत होने पर क्या है कानूनी और मुआवजा प्रक्रिया?
विदेश में किसी भारतीय श्रमिक की मौत होने पर भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कराता है। दूतावास परिजनों को सूचना देने, दस्तावेजी औपचारिकताओं और पार्थिव शरीर को भारत भेजने में सहायता करता है। इसके खर्च का वहन आमतौर पर नियोक्ता, बीमा कंपनी या इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) द्वारा किया जाता है। वहीं, यदि मौत कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना या लापरवाही का परिणाम हो, तो स्थानीय कानूनों के तहत नियोक्ता को मुआवजा देना पड़ सकता है।

