NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका सबसे अधिक असर अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव में झटका झेल चुकी बीजेपी के सामने यूपी में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है। ऐसे में प्रधान के इस्तीफे के बाद बदले राजनीतिक समीकरण पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
युवाओं और छात्रों का गुस्सा
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक, अनियमितताओं और परिणामों में देरी को लेकर विवादों में रही हैं। 2024 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द होने से लाखों अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ी थी। वहीं, NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले आंदोलन को यूपी के युवाओं का भी व्यापक समर्थन मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने युवाओं की नाराजगी को नई आवाज दी, जिससे भाजपा पर दबाव बढ़ा और उसे रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा।
मतभेदों से परे एकजुट होता विपक्ष
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मुद्दा भाजपा के लिए इसलिए भी चुनौती बन गया है क्योंकि इससे विपक्ष को युवाओं से जुड़ा एक मजबूत चुनावी मुद्दा मिल गया है। पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे सवाल जाति और वर्ग की सीमाओं से परे जाकर बड़ी संख्या में युवाओं को प्रभावित करते हैं। वहीं, इस मुद्दे पर सपा और कांग्रेस की सक्रियता तथा उनके नेताओं की संयुक्त मौजूदगी ने विपक्षी एकता के संदेश को भी मजबूत किया है।
2024 लोकसभा चुनाव को दोहराने की रणनीति
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। अब विपक्ष छात्र आंदोलनों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के जरिए इस माहौल को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखने की कोशिश में है। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रही संस्था CJP ने भी संकेत दिए हैं कि यदि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े विवाद जारी रहे, तो उत्तर प्रदेश उनके अभियान का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के मायने
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे युवाओं और छात्रों की बढ़ती नाराजगी के असर के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी, पेपर लीक, छात्र असंतोष और सुशासन जैसे मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं। ऐसे में विपक्ष इन मुद्दों को सरकार के खिलाफ बड़ा चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है।

