Haridwar Hate Speech Case

Haridwar Hate Speech Case:जितेंद्र नारायण त्‍यागी गिरफ्तार,जानें क्या है पूरा मामला

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Haridwar Hate Speech Case: हरिद्वार हेट स्‍पीच (Haridwar Hate Speech Case) मामले में वसीम रिजवी (Waseem Rizvi)उर्फ जितेंद्र नारायण त्‍यागी (Jitendra Narayan Tyagi) को गिरफ्तार कर लिया गया है। हरिद्वार (Haridwar) पुलिस ने उन्‍हें नारसन बॉर्डर से गिरफ्तार किया है। उन्‍होंने धर्म संसद में भड़काऊ भाषण दिया था। जितेंद्र नारायण त्‍यागी (Jitendra Narayan Tyagi) के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने को लेकर हरिद्वार (Haridwar) नगर कोतवाली में केस दर्ज है। इस मामले की जांच SIT कर रही है। बता दें कि भड़काऊ भाषण देने के मामले में 4 अन्‍य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज है। जितेंद्र नारायण त्‍यागी (Jitendra Narayan Tyagi) उर्फ वसीम रिजवी शिया वक्‍फ बोर्ड के अध्‍यक्ष भी रह चुके हैं।

हरिद्वार हेट स्‍पीच (Haridwar Hate Speech) का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने हरिद्वार (Haridwar) और दिल्ली में कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण मामले में उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर 10 दिन के अंदर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्‍पीच देने वाले लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर यह आदेश दिया है। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी चल रही जांच में दो नामजद आरोपियों और कम से कम 12गवाहों के बयान दर्ज किए।

SIT कर रही जांच
इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) भी गठित की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विशेष जांच टीम में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नफरत फैलाने वाले भाषण मामले में अब तक 5 में से 2 आरोपियों से पूछताछ की गई है। उनके बयान बुधवार को दर्ज किए गए थे। इसके अलावा एसआईटी (SIT) ने मामले के शिकायतकर्ताओं समेत गवाह के तौर पर 12 और लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। पुलिस शेष 3 अन्य आरोपियों से जल्द ही पूछताछ करेगी।
क्या है हरिद्वार हेट स्‍पीच मामला

हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन किया गया था। इस धर्म संसद में हिंदुत्व और मुसलमानों को लेकर साधु-संतों के विवादित भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इन वीडियो में संतों और धर्मगुरुओं ने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री न बनने देने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने और कॉपी-किताब त्यागने जैसे बयान दिए हैं।

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