आरक्षण के मुद्दे पर मायावती ने मोहन भागवत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म होने तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म करने पर ध्यान दिया जाए.
5 मुख्य बातें
मायावती ने मोहन भागवत के बयान पर पलटवार किया.
उन्होंने कहा कि जातिवाद खत्म होने तक आरक्षण जरूरी है.
मायावती ने क्रीमी लेयर का विरोध किया.
RSS से आरक्षण पर राजनीति छोड़ने की नसीहत दी.
आरक्षण कमजोर करने के बजाय जातिगत भेदभाव खत्म हो.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत पर आरक्षण को लेकर पलटवार किया है. हाल ही में भागवत ने आरक्षण का फायदा उठाने वालों से इसका लाभ छोड़ने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि आरक्षण का राजनीतिकरण किया गया है, जिससे समाज में कड़वाहट पैदा हुई है और आरक्षण के लाभार्थियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिए. वहीं उनके इस बयान पर मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
BSP चीफ मायावती ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि देश के बहुजन समाज, खासकर SC, ST और OBC वर्गों के लिए आरक्षण सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक मुक्ति और आत्म-सम्मान से जुड़ा बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है.
जातिगत भेदभाव मिटाना जरूरी’
पूर्व सीएम ने कहा कि जाति के आधार पर सदियों से चली आ रही छुआछूत, शोषण, प्रताड़ना और अन्याय के खिलाफ आरक्षण बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जातिवादी सोच और भेदभाव पूरी तरह खत्म होने तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी. उन्होंने आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात को अनुचित बताते हुए कहा कि यह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी खिलाफ है.
आरक्षण सामाजिक न्याय से जुड़ा है’
मायावती ने कहा कि आरक्षण का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाना वास्तविकता से परे है, क्योंकि आरक्षण संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय से जुड़ा है. उन्होंने दावा किया कि आरक्षण ने सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित, पीड़ित और उपेक्षित लोगों को समानता और संवैधानिक अधिकार दिलाने का काम किया है.
‘जातिवाद का दंश आज भी हर क्षेत्र में मौजूद’
मायावती ने कहा कि जातिवाद का दंश आज भी समाज के हर क्षेत्र में मौजूद है, इसलिए आरक्षण को खत्म करने या कमजोर करने की बात उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र सहित अब तक की सभी सरकारें आरक्षण की संवैधानिक जरूरत को समझती रही हैं, इसलिए वर्तमान सरकार को भी व्यावहारिक और उचित समीक्षा कर SC-ST समाज को आरक्षण की कमी से दूर रखना चाहिए.
मायावती ने आरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायपालिका से भी संवैधानिक भावना के अनुरूप न्याय करने की अपेक्षा जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण और सामाजिक परिवर्तन जैसे मामलों में सही पैरवी और मजबूत कानूनी पक्ष के अभाव में अदालतों से अपेक्षित न्याय नहीं मिल पाता.
मायावती की RSS को नसीहत
मायावती ने अपनी पोस्ट में RSS को नसीहत देते हुए कहा ‘RSS से यही कहना है कि वह बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुए आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में समतामूलक समाज व्यवस्था (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की मांग भी है’. उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने के बजाय जातिगत भेदभाव खत्म करने पर ध्यान दिया जाए.

