बिहार का रण: दूसरा चरण साफ करेगा बिहार की सियासी तस्वीर, तेजस्‍वी की प्रतिष्‍ठा भी दांव पर

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दूसरे चरण में राज्‍य की सियासी तस्‍वीर साफ हो जाएगी। इसी चरण में महागठबंधन के मुख्‍यमंत्री चेहरे व राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) की प्रतिष्‍ठा भी दांव पर लगी है। तेजस्वी वैशाली के राघोपुर से चुनाव मैदान में हैं। दूसरे चरण में ही राज्य के 4 मंत्रियों का कामकाज भी जनता की कसौटी पर है। RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के समधी चंद्रिका राय (Chandrika Rai) भी इसी चरण में JDU की टिकट से परसा विधानसभा सीट पर भाग्‍य आजमा रहे हैं। दूसरी तरफ कई बाहुबलियों के नाते-रिश्‍तेदार भी विधायक बनने की होड़ में हैं।

दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों के लिए 1514 प्रत्‍याशी मैदान में हैं। सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एवं विपक्षी महागठबंधन (Mahagahbandhan), दोनों के बीच हार-जीत के खेल का यह बड़ा प्लेटफार्म साबित होने वाला है, क्योंकि पहले और दूसरे चरण को मिलाकर दो तिहाई से ज्यादा सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद हो जाएगी। वहीँ तीसरे और अंतिम चरण में सत्ता के खेल में हार जीत के अंतर् को घटाने-बढ़ाने की औपचारिकता मात्र रह जाएगी।

दूसरे दौर में सबकी नजर दो महत्वपूर्ण सीटों राघोपुर और हसनपुर पर सबसे ज्यादा टिकी रहेंगी। राघोपुर से नेता प्रतिपक्ष एवं महागठबंधन के मुख्यमंत्री के प्रत्याशी (CM Face) तेजस्वी यादव और हसनपुर सीट से उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के भाग्य का फैसला होना है। तेजस्वी अपनी पुरानी सीट से ही चुनाव मैदान में हैं, जबकि तेजप्रताप ने इस बार महुआ के बदले हसनपुर को चुना है। उनका मुकाबला JDU के राजकुमार राय से होगा, जो पिछली 2 बार से विधायक हैं। लालू परिवार के लिए राघोपुर को सुरक्षित दुर्ग माना जाता है। यहां से 1995 में पहली बार लालू प्रसाद चुनाव जीते थे। 2005 में राबड़ी देवी (Rabri Devi) ने भी लालू की विरासत को बरकरार रखा। लालू परिवार के आधिपत्य को वर्ष 2010 में JDU के टिकट पर सतीश राय ने राबड़ी को हराकर खत्म किया। अबकी सतीश BJP के टिकट पर तेजस्वी के रास्ते में खड़े हैं।

राज्य सरकार के 4 मंत्रियों का कामकाज जनता की कसौटी पर है। चार में दो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और दो जनता दल यूनाइटेड (JDU) के हैं। पटना साहिब से BJP के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री नंद किशोर यादव और मधुबन से मंत्री राणा रणधीर सिंह हैं तो नालंदा से JDU के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार और हथुआ से मंत्री रामसेवक सिंह। लालू प्रसाद के समधी चंद्रिका राय को JDU ने परसा से उतारा है। वे पिछली बार RJD के टिकट पर जीते थे, लेकिन पारिवारिक झगड़े ने पार्टी बदलने पर विवश किया। लालू ने अपने समधी के खिलाफ छोटेलाल राय को टिकट दिया है।

दूसरे चरण में बाहुबलियों को खूब तरजीह मिली है। किसी वजह से अगर दबंग को टिकट देना मुनासिब नहीं माना गया तो उनके नाते-रिश्तेदारों को सिंबल थमा दिया गया। JDU ने बोगो सिंह को मटिहानी, धूमल सिंह की पत्नी सीता देवी को एकमा, रणवीर यादव की पत्नी पूनम देवी को खगडिय़ा और अमरेंद्र पांडेय को कुचायकोट से मैदान में उतारा है। RJD ने शिवहर से आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद को उपकृत किया है। पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला लालगंज से निर्दलीय ही किस्मत आजमा रहे हैं।

बिहार चुनाव का कड़कउसरा चरण गवाह बन रहा है भाई-भतीजावाद का भी। कई बड़े नेताओं ने बेटे-बेटियों और भतीजों को भी टिकट दिलाया है। कांग्रेस के 4 प्रत्याशी ऐसे ही हैं। पटना के बांकीपुर से फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा, बिहारीगंज से समाजवादी नेता शरद यादव की पुत्री सुभाषिनी, लालगंज से पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार के भतीजे पप्पू सिंह कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमा रहे हैं। LJP के प्रदेश अध्यक्ष प्रिंस राज के भाई रोसड़ा से चुनाव लड़ रहे हैं। जेडीयू ने हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव आर्य के पुत्र कौशल किशोर को राजगीर से उतारा है।

2015 के चुनाव परिणाम की बात करें तो कुल सीटों में से 30 पर JDU और 33 पर RJD को जीत मिली थी। BJP को 20 और कांग्रेस के खाते में सात सीटें आई थीं। LJP को दो तथा एक-एक पर माले और निर्दलीय को जीत मिली थी। तब RJD, JDU और कांग्रेस एक साथ थे। उस हिसाब से 70 सीटों पर महागठबंधन और LJP समेत 22 पर NDA को कामयाबी मिली थी। अब महागठबंधन के बिखरने के बाद यह समीकरण बदल गया है। LJP के रास्ते अलग होने के बावजूद JDU व BJP के साथ से मजबूत हुआ है। दोनों का दायरा बढ़कर 50 हो गया है।

किसके कितने प्रत्याशी- महागठबंधन

  • RJD: 56
  • कांग्रेस: 24
  • CPM: 4
  • CPI: – 4
  • CPI ML: 6

NDA

  • BJP: 45
  • JDU: 43
  • VIP: 6

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