बंगाल में सियासी हलचल बढ़ी, TMC के बागी सांसदों का ठिकाना NCPI हुई अब ‘बहुजन’!

TMC के 20 बागी सांसदों को लेकर बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. NCPI के नाम के आगे Bahujan जुड़ गया है. इससे सियासी गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं.

5 मुख्य बातें

20 सांसदों ने TMC से बगावत की

काकोली घोष दस्तीदार बनीं नए गुट की नेता

NCPI को संसद में मान्यता नहीं मिली

क्या NCPI अब Bahujan NCPI बनेगी?

20 बागी सांसदों का अगला कदम क्या होगा?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस दो टुकड़ों में बंट गई है. पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने रातों-रात बगावत का ऐलान कर दिया और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया. इसके बाद उन सांसदों ने NCPI में विलय का ऐलान कर दिया, लेकिन उस पार्टी को अभी तक संसद में मान्यता नहीं मिली है. बागी सांसदों के नाम के आगे अभी भी तृणमूल कांग्रेस लिखा जा रहा है. ऐसे में बागी सांसद अब विकल्प की तलाश कर रहे हैं.

ऐसे में NCPI की जगह अब बहुजन NCPI की बात सामने आ रही है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लोगों से इस पार्टी में शामिल होने की अपील की है.

बहुजन NCPI में दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों, OBC को बहुजन NCPI में शामिल होने का न्योता दिया गया है. संपर्क के लिए एक फोन नंबर भी दिया गया है. पोस्ट में कहा गया है कि पार्टी के सभी पदों पर दलितों, मोस्ट बैकवर्ड क्लास, महादलितों, मतुआ और नामशूद्रों के लिए 25 परसेंट रिप्रेजेंटेशन पक्का करने का फैसला किया गया है.

क्या NCPI में पड़ गई है फूट?

हालांकि इस मुद्दे पर काकोली घोष दस्तीदार के बेटे का एक्सप्लेनेशन है कि यह अलग नहीं है. बल्कि, यह कहना बेहतर होगा कि यह पार्टी का एक विंग या ब्रांच या ट्रस्ट है. यह ब्रांच आदिवासियों, मुसलमानों, शेड्यूल्ड ट्राइब्स, दलितों के लिए काम करेगी. उन्हें कंप्यूटर देने से लेकर, यह सोशल सर्विस का काम करेगी. हालांकि, सवाल यह उठता है कि कोई ट्रस्ट या MP पर्सनल इनिशिएटिव पर काम कर सकता है, लेकिन जब से बहुजन NCPI पार्टी पोस्ट कर रही है, क्या NCPI के अंदर कोई असहमति हुई है?

काकोली घोष दस्तीदार ने इस पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा, यह हमारे सोशल मीडिया सेल से पोस्ट किया गया था. हम, 20 सांसदों ने, पिछले सत्र में नई पार्टी में काम किया और आने वाले दिनों में भी काम करते रहेंगे. नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया सबके साथ जारी रहेगी. खासकर जो समाज में पिछड़े वर्ग से हैं, दलित कम्युनिटी, दलित, महिलाएं और आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं.

बहुजन NCPI को लेकर अटकलें तेज

बता दें कि ये 20 सांसद तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते थे. हालांकि अब वे NCPI नाम की पार्टी में शामिल हो गए हैं, लेकिन वह पार्टी जनता पर कोई खास असर नहीं डाल पाई है. पार्टी को अभी तक संसद में पहचान नहीं मिली है. इससे यह अटकलें लगने लगी है कि क्या एनसीपीआई अब बहुजन एनसीपीआई में बदलने जा रही है.

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