कानपुर के मास्टरमाइंड गैंगस्टर की जिंदगी की पूरी कहानी

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कानपुर गोलीकांड का आरोपी गैंगस्टर Vikas Dubey आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। एनकाउंटर के सातवें दिन विकास को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया, बताया जा रहा है कि उसने खुद ही स्थानीय मीडिया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी विकास पर कोई असर नहीं दिखा और मीडिया के सामने चिल्लाने लगा, ‘..मैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला’।

आज सुबह ही Vikas Dubey महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा और सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर Vikas Dubey ने मंदिर के सामने अपना नाम चिल्लाया। मौके पर स्थानीय मीडिया को भी बुला लिया गया था। बताया ये भी जा रहा है कि उसने मंदिर के बाहर खड़े होकर अपना नाम चिल्लाया, फिर लोगों ने पुलिस को सूचित किया।

स्थानीय मीडिया के साथ ही स्थानीय पुलिस भी महाकालेश्वर मंदिर के सामने पहुंची और Vikas Dubey को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि Vikas Dubey ने सरेंडर करने की सूचना स्थानीय मीडिया और पुलिस को दी थी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

जब पुलिस Vikas Dubey को पकड़कर महाकाल थाने में ले जा रही थी, तब विकास दुबे लगातार मीडिया से बात कर रहा था। इसी दौरान वो चिल्लाया, ‘…मैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला’।

कैसे उज्जैन पहुंचा विकास दुबे?

Vikas Dubey कानपुर की घटना के बाद भाग गया था, जिसके बाद हरियाणा के फरीदाबाद में उसकी झलक दिखी थी। फरीदाबाद के एक होटल के CCTV कैमरे में विकास दुबे को देखा गया था, लेकिन वो वहां से फरार हो गया। छापे में उसके गुर्गे गिरफ्तार कर लिए गए थे।

Vikas Dubey लगातार छुपता हुआ भाग रहा था, पहले उसके नोएडा और फिर राजस्थान जाने की बात की जा रही थी। ऐसे में पुलिस ने NCR में लगातार छापेमारी की थी। लेकिन विकास दुबे वहां पर भी नहीं मिला..अब सात दिन बाद उसके उज्जैन में मिलने की खबर आई।

फरीदाबाद से उज्जैन कैसे पहुंच गया विकास दुबे, कौन कर रहा था मदद?

सूत्रों की मानें तो फरीदाबाद से मध्य प्रदेश तक वो आसानी से एक गाड़ी में पहुंचा, जो पूरी तरह सेफ थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इतनी बंदिशों के बाद भी Vikas Dubey आखिर कैसे इतना लंबा सफर कर पाया।

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