यूपी में बनेगा ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’, OBC राजनीति में बड़ा दांव! जानिए क्या होंगे इसके अधिकार

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में सोमवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में अहम कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें पंचायत चुनावों को लेकर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव सबसे महत्वपूर्ण रहा। सरकार ने यह कदम पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्ग के आरक्षण से जुड़े मुद्दों की समीक्षा और आवश्यक सिफारिशें तैयार करने के उद्देश्य से उठाया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आयोग की जिम्मेदारियां क्या होंगी और इसमें किन सदस्यों को शामिल किया जाएगा।

क्यों होगा आयोग का गठन?
उत्तर प्रदेश सरकार ने जानकारी दी है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग पिछड़े वर्गों की सामाजिक स्थिति, उनके प्रतिनिधित्व और आरक्षण की आवश्यकता का विस्तृत अध्ययन करेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अनुपातिक आरक्षण तय किया जाएगा। बता दें कि राज्य सरकार Uttar Pradesh में Uttar Pradesh Panchayati Raj Act, 1947 और Uttar Pradesh Kshettra Panchayat and Zila Panchayat Adhiniyam, 1961 के तहत पंचायत चुनावों में आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया संचालित करती है।

सरकार की ओर से जारी नोटिस में बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ और संबंधित कानूनों के तहत प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों में आरक्षण और सीटों के आवंटन की व्यवस्था पहले से लागू है। इसके लिए Uttar Pradesh Panchayat Raj Act, 1947 और Uttar Pradesh Kshettra Panchayat and Zila Panchayat Adhiniyam, 1961 में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही पंचायतों में अध्यक्ष और सदस्यों के पदों के आरक्षण एवं आवंटन की प्रक्रिया तय करने के लिए वर्ष 1994 की नियमावलियां भी लागू हैं। इन नियमों के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह त्रिस्तरीय पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों और पदों को आरक्षित कर सके।

कितने आरक्षण का प्रावधान होगा?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों की संख्या राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में तय की जाएगी। यानी जिस वर्ग की आबादी जितनी होगी, पंचायतों में आरक्षण भी उसी अनुपात में देने की कोशिश की जाएगी। हालांकि पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण की सीमा कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं, तो सरकार निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वेक्षण कराकर उनकी आबादी का आकलन कर सकती है।

कौन होंगे आयोग के सदस्य?
मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले इस आयोग में कुल पांच सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। आयोग में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों और सामाजिक स्थिति का अच्छा अनुभव व ज्ञान हो। इनमें से एक सदस्य Allahabad High Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। सरकार की ओर से तय व्यवस्था के अनुसार आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से सामान्य रूप से छह महीने का रहेगा।

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