सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। यह कार्रवाई TMC नेता अभिषेक बनर्जी की उस याचिका के बाद हुई है, जिसमें दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। वहीं, नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि मामला कानूनी प्रक्रिया में है और इस पर पार्टी के वकील कल्याण बनर्जी पहले ही अपना पक्ष रख चुके हैं, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
टीएमसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई
टीएमसी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NCPI में शामिल हो चुके 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से दलबदल विरोधी कानून के तहत लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। इस मामले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में पक्ष रखा।
टीएमसी में कौन कौन हुआ था बागी
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया और कई सांसदों व नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली। बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय ने किया। इस गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया और प्रसून बनर्जी समेत कई चर्चित चेहरे शामिल हैं।
बागियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी टीएमसी
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। उनका आरोप है कि ये सांसद टीएमसी के टिकट पर जीतने के बाद पार्टी छोड़कर NCPI में शामिल हो गए। वहीं, बागी सांसदों का दावा है कि उन्हें टीएमसी के दो-तिहाई लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल है, इसलिए उन्होंने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।

