WEST BENGAL

बंगाल चुनाव हारते ही टीएमसी में दो फाड़? फर्जी साइन से सामने आई फूट, पार्टी को कैसे बचा पाएंगी दीदी?

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए. अब जो हालात वहां बनते नजर आ रहे हैं, उनसे लगता है कि तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी. विधानसभा में नेता विपक्ष की नियुक्ति वाले मामले ने टीएमसी के अंदर की फूट को सामने ला दिया है.

दरअसल ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया है. इस नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को आरोप लगाया कि स्पीकर को भेजे गए लेटर पर कुछ टीएमसी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर थे. इतना ही नहीं सीएम ने टीएमसी के दो विधायकों रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा का नाम भी लिया, जिन्होंने इसको लेकर जालसाजी की शिकायत की. मुख्यमंत्री के आरोपों के बाद ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में बाहर निकाल दिया.

TMC की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है. यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है, न कि पार्टी नेता ममता बनर्जी पर. रविवार को यह मतभेद तब साफ हो गया जब TMC के 80 में से 60 MLA ममता बनर्जी के घर पर बुलाई गई मीटिंग में शामिल नहीं हुए.

अभिषेक बनर्जी पर क्यों भड़के विधायक?

टीएमसी से निकाले गए विधायक संदीपन साहा ने इस मामले के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ने ही MLA की लिस्ट पर साइन किए थे. एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नाराज टीएमसी विधायकों को मनाने के लिए और सदन में पार्टी को एकजुट बनाए रखने के लिए कोलकाता में जोरदार मीटिंग चल रही हैं. अब देखना होगा कि ममता बनर्जी टीएमसी को किस तरह एकजुट रख पाएंगी.

फर्जी हस्ताक्षर मामले की CID जांच

फर्जी साइन का मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल CID ने जांच शुरू कर दी है. इस मामले में कई तृणमूल नेताओं को नोटिस भेजा गया है. CID ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया भी था. हालांकि वह सीआईडी के समन पर नहीं गए थे.

चुनाव हारने के बाद से टीएमसी अपने नेताओं को एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रही है. ममता बनर्जी की कुर्सी जाने के बाद कई नेताओं ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है. पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तो जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है.

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