टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की ‘रामायण’ और बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ को आज भी खास पहचान हासिल है। इन धारावाहिकों की लोकप्रियता दशकों बाद भी कम नहीं हुई है। लेकिन क्या आपको पता है कि ‘रामायण’ के निर्माण के लिए डिज्नी से फंडिंग लेने की कोशिश की गई थी, लेकिन बात नहीं बन पाई? आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने एक पॉडकास्ट में इस दिलचस्प किस्से का जिक्र किया। उनके मुताबिक, डिज्नी के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में रामानंद सागर के पहनावे और बातचीत के अंदाज का भी असर पड़ा। बताया जाता है कि इस मुलाकात के दौरान कंपनी के अधिकारी प्रोजेक्ट की संभावनाओं को ठीक से समझ नहीं पाए, जिसके चलते फंडिंग का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
ललित मोदी ने क्यों किया था डिज्नी से संपर्क?
‘द भारत इंक’ पॉडकास्ट में ललित मोदी ने बताया कि उस दौर में दूरदर्शन का काम करने का तरीका दूसरे टीवी नेटवर्क से काफी अलग था। दूरदर्शन धारावाहिक बनाने के लिए निर्माताओं को सीधे पैसे नहीं देता था, बल्कि कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लिया जाता था। ऐसे में बड़े बजट के शो बनाना और उनकी लागत निकालना आसान नहीं था।
ललित मोदी के मुताबिक, उस समय उन्होंने कंटेंट तैयार करने, उसकी मार्केटिंग करने और वितरण के लिए एक खास मॉडल बनाया था। इस दौरान डिज्नी के साथ साझेदारी और विदेशी कार्यक्रमों को भारतीय टेलीविजन तक पहुंचाने से जुड़ा अनुभव भी उनके पास था। इसी बीच रामानंद सागर और बीआर चोपड़ा ने उनसे संपर्क किया। रामानंद सागर अपनी ‘रामायण’ और बीआर चोपड़ा ‘महाभारत’ के निर्माण के लिए आर्थिक मदद चाहते थे।
ललित मोदी के मुताबिक, वह ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ दोनों धारावाहिकों को आर्थिक मदद देने के लिए तैयार थे। इसी सिलसिले में उन्होंने डिज्नी के अधिकारियों के सामने रामानंद सागर के साथ मिलकर ‘रामायण’ बनाने का प्रस्ताव भी रखा। हालांकि, डिज्नी को इस बात की चिंता थी कि कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में उतरने से उसके मौजूदा कारोबार पर असर पड़ सकता है। कंपनी को आशंका थी कि इससे उसके कंटेंट की बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स के बीच हितों का टकराव पैदा हो सकता है।
एक करोड़ रुपये की मांग पर भी हुई थी चर्चा
ललित मोदी ने बताया कि उन्होंने डिज्नी के बड़े अधिकारियों को समझाया था कि रामानंद सागर की मांग पूरी करके कंपनी ‘रामायण’ के अधिकार हासिल कर सकती है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट में करीब एक करोड़ रुपये निवेश करने का सुझाव दिया। काफी प्रयासों के बाद डिज्नी के अधिकारी बैठक के लिए भारत आने को राजी हो गए। ललित मोदी के अनुसार, कंपनी के अधिकारी बड़े प्रतिनिधिमंडल और निजी विमानों के साथ भारत पहुंचे थे। हालांकि, बैठक के दौरान कुछ ऐसी बातें हुईं, जिनसे माहौल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ललित मोदी के मुताबिक, उस समय कारोबारी बैठकों में औपचारिक पहनावे और व्यवस्थित प्रेजेंटेशन को काफी महत्व दिया जाता था, लेकिन रामानंद सागर शॉर्ट्स पहनकर बैठक में पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि उनका यह पहनावा डिज्नी के अधिकारियों को पसंद नहीं आया। इसके अलावा, रामानंद सागर की अंग्रेजी सीमित होने के कारण बातचीत में भी तालमेल की कमी रही। डिज्नी के अधिकारी जिस तरह की विस्तृत प्रस्तुति और कारोबारी चर्चा की उम्मीद कर रहे थे, वैसा माहौल नहीं बन सका। ललित मोदी के अनुसार, बैठक के दौरान उन्हें लगा कि डिज्नी के अध्यक्ष जल्द से जल्द वहां से निकलना चाहते थे।
डिज्नी नहीं समझ पाया ‘रामायण’ की ताकत?
ललित मोदी ने बताया कि उस दौर में भारतीय टेलीविजन पर पौराणिक कहानियों को इतने बड़े पैमाने पर दिखाने का चलन नया था। उनके अनुसार, डिज्नी के अधिकारियों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि ‘रामायण’ भारतीय दर्शकों के बीच इतनी लोकप्रिय हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिज्नी के साथ साझेदारी होने के चलते कंपनी के फैसले को अपनी मर्जी से बदलना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में रामानंद सागर की ‘रामायण’ के लिए डिज्नी से फंडिंग जुटाने की उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। हालांकि, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव आगे न बढ़ने की वजह रामानंद सागर का पहनावा था या फिर इसके पीछे कंपनी की कारोबारी रणनीति और उस समय की परिस्थितियों की भी भूमिका थी।

