UP Election 2027

यूपी में 2024 के झटके से उबरने के लिए मिशन 2027 पर बीजेपी की नजर! इन चार मुद्दों पर है खास फोकस

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे के बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के चुनाव के लिए पार्टी ने कमर और कस ली है. बीजेपी चीफ ने न सिर्फ सांगठनिक बैठकें कीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से अलग-अलग मुलाकातें भी कीं. नवीन ने यूपी बीजेपी चीफ पंकज चौधरी और यूपी बीजेपी प्रभारी धर्मपाल सैनी से भी मीटिंग की. इस दौरान उनके साथ बीएल संतोष भी थे.

नवीन ने बीजेपी संगठन के अलावा पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के सहयोगी दलों- सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोकदल और निषाद पार्टी के नेताओं से भी बैठक की.

1-हैट्रिक पर बीजेपी की नजर
यूपी में बीजेपी जीत की हैट्रिक पर नजर बनाए हुए है. साल 2017 में पहली बार अपने दम पर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली बीजेपी 2022 में भी जीती थी लेकिन सीटों का आंकड़ा घटकर 265 के करीब पहुंच गया था. ऐसे में बीजेपी आगामी चुनाव में न सिर्फ जीतना चाहती है बल्कि सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दे रही है.

2-सीटों के समीकरण साधने की कोशिश
बीजेपी उन सीटों पर नजर बना रही है जिस पर वह साल 2022 के चुनाव में हार गई थी या साल 2024 के चुनाव में उन सीटों पर वह पिछड़ गई थी. बीजेपी उन सीटों पर सभी कील-कांटें दुरुस्त कर रही है.

3-पीडीए की काट निकालने की कोशिश
यूपी में बीजेपी सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट निकालने में लगी है. इसका हालिया उदाहरण, यूपी बीजेपी की नई टीम में भी दिखा है. संभावना है कि राष्ट्रीय टीम में भी यूपी को तवज्जो दी जाए. बीजेपी इस रणनीति पर काम कर रही है कि साल 2024 के चुनाव की तरह सपा और कांग्रेस का अलायंस आगामी इलेक्शन में अगर ऐसे दावे करे जिससे कि बीजेपी के समीकरण वाली जातियों के उससे अलग होने की संभावना हो तो वह अपने नेताओं को आगे कर, विपक्ष के दावों और वादों का खंडन कर सके.

4-सहयोगियों को अलगाव का एहसास न हो
नितिन नवीन, लखनऊ आए तो बीजेपी नीत एनडीए के सहयोगी दलों से भी मिले. इसके पीछे बीजेपी की कोशिश थी कि वह यह जान सके कि सहयोगियों की क्या रणनीति है, उनकी मांगें क्या हैं और वह किस तरह से बीजेपी की जीत में अपनी भूमिका अदा कर पाएंगे. बीजेपी उन्हें कहीं से भी अलग-थलग होने का एहसास नहीं दिलाना चाहती है. इन बैठकों के जरिए बीजेपी न सिर्फ सहयोगी दलों से अपना समन्वय और बेहतर करने की कोशिश में है बल्कि क्षेत्रीय दलों के आपसी सामंजस्य को भी ठीक करना चाहती है. उदाहरण के लिए बीते कुछ महीनों से यह चर्चा है कि सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर, उस सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं जिस पर निषाद पार्टी का दावा है. राजभर के इस दावे पर निषाद ने कुछ खुलकर नहीं कहा लेकिन दबी जुबान से यह जरूर कहा कि इसका हल निकाल लिया जाएगा.
इन बैठकों और रणनीतियों के जरिए बीजेपी पूरी कोशिश में है कि वह तीसरी बार अच्छे संख्या बल के साथ विधानसभा में पहुंचे. यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की इन रणनीतियों का विपक्ष यूपी में क्या जवाब देता है.

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