नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से बचने वाले पीड़ित दीपक तमांग ने उस खौफनाक वक्त को याद करते हुए अपना अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान हर तरफ अफरा-तफरी मच गई थी और लोग जान बचाने के लिए ऊंची जगहों की ओर भागने लगे थे। देखते ही देखते नदी का तेज बहाव घरों को अपनी चपेट में लेने लगा और पानी के साथ कीचड़ व मलबे का सैलाब भी बहने लगा।
दीपक तमांग के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद धरती हिल रही है। लेकिन कुछ ही देर में उन्हें एहसास हुआ कि तिमुरे मार्केट में भोटेकोशी नदी के किनारे बने मकानों की ओर पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों का तेज बहाव बढ़ रहा है। हालात इतने भयावह हो गए थे कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए तुरंत ऊंचाई की ओर भागने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आया।
मेरे पास ऊपर की तरफ भागने का ही ऑप्शन था
दीपक तमांग ने बताया, “जब मैं घर से बाहर आया और ऊपर पहाड़ी की तरफ भागा, तब भयानक बाढ़ के कारण कुछ मकान पहले ही ढह चुके थे। मेरे पास तब ज्यादा ऑप्शन नहीं थे। मेरे पीछे की तरफ तेजी से बढ़ता हुआ बाढ़ का पानी था और सामने की ओर दीवार जैसी खड़ी पहाड़ी।”
कांटेदार झाड़ियों और पौधों को पकड़कर आगे बढ़े दीपक
दीपक तमांग के मुताबिक, पहले वह ढलान की ओर भागे और उस पहाड़ी पर चढ़ने का प्रयास करने लगे, जो दीवार जैसी लग रही थी। इस दौरान, वह खुद कई बार गिर गए, लेकिन कांटेदार झाड़ियों और पौधों को पकड़कर ऊपर की तरफ बढ़ना उन्होंने जारी रखा।
मुझे लगा वह मेरी जिंदगी का आखिरी लमहा था
दीपक तमांग ने आगे कहा, “यह जीवन और मौत के बीच मेरी आखिरी रेस की तरह था। हर बार मैं जब गिरता था, तो मुझे लगता कि यह मेरे जीवन का आखिरी लमहा है।” उन्होंने ये भी बताया कि बाढ़ के पानी की चपेट में आ जाने से बचने के प्रयास में लोग अलग-अलग दिशाओं में दौड़ रहे थे।
मैंने अपनी आखों से दोस्तों को बहते हुए देखा
दीपक तमांग ने कहा कि आखिरकार जब वह पहाड़ी की चोटी पर पहुंचे, तो उन्होंने लोगों को बाढ़ के तेज पानी में बहते हुए देखा, जिनमें उनके दोस्त भी शामिल थे। जब मेरी आंखों के सामने मेरे दोस्त तेज लहरों में बह रहे थे, तब मैं उन्हें बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर सका। नेपाल के राष्ट्रपति ने भारत की मदद के लिए तारीफ की है। नेपाली मंत्री ने भी PM मोदी को ‘बेहद उदार’ बताया है।

