अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को छह महीने हो चुके हैं। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है, क्योंकि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली कच्चे तेल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बढ़ती ईंधन कीमतों और घटते अमेरिकी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के बीच घरेलू दबाव का सामना कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब बड़ा दांव खेलते हुए वेनेजुएला के साथ ‘इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील’ का ऐलान किया है।
समझौते की मुख्य शर्तें और 100 साल का अधिकार
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुई इस बड़ी तेल डील को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया। समझौते के तहत अमेरिका एक निजी कंपनी के जरिए वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों का विकास करेगा, जिसके लिए 100 साल की लीज दी गई है। इस व्यवस्था में अमेरिका को तेल उत्पादन में 55% प्रभावी हिस्सेदारी मिलेगी। वेनेजुएला का दावा है कि इस परियोजना से 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा, जबकि सरकार को 209 अरब डॉलर से अधिक टैक्स राजस्व मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह कंपनी सऊदी अरामको के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तेल भंडार वाली कंपनी बन सकती है।
वेनेजुएला का भारी तेल बनाम ईरान का हल्का तेल
हालांकि, इस डील के साथ तेल की गुणवत्ता का पहलू भी अहम है। वेनेजुएला का Merey Blend बेहद भारी और अधिक सल्फर वाला कच्चा तेल माना जाता है, जिसे रिफाइन करने के लिए विशेष तकनीक और उन्नत रिफाइनरियों की जरूरत होती है। इसके मुकाबले ईरान का कच्चा तेल हल्का और कम सल्फरयुक्त है, जिससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पाद आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। यही कारण है कि ईरानी तेल वैश्विक बाजार में अधिक मांग वाला है, जबकि वेनेजुएला का तेल सीमित रिफाइनिंग क्षमता वाले बाजारों पर ज्यादा निर्भर करता है।
क्या इस डील से अमेरिका में तुरंत घटेंगे पेट्रोल के दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत नहीं दिखेगा। लंबे समय से प्रतिबंधों और खराब प्रबंधन के कारण वेनेजुएला का तेल उद्योग कमजोर हो चुका है। दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार होने के बावजूद देश फिलहाल बहुत सीमित उत्पादन कर पा रहा है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े निवेश और कई वर्षों की जरूरत होगी। माना जा रहा है कि अमेरिका इस तेल का उपयोग पहले अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को मजबूत करने और भविष्य की सैन्य ईंधन जरूरतों को पूरा करने में करेगा।
तो क्या है डील का हासिल
विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप का यह फैसला सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीतिक और भू-राजनीतिक सोच भी है। भले ही इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के मौजूदा संकट का तुरंत समाधान नहीं होगा, लेकिन लंबे समय के इस समझौते के जरिए अमेरिका ने लैटिन अमेरिका में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ भविष्य के विशाल तेल भंडारों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

