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मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका, SC ने कहा- नामांकन खारिज होने के बाद यह मामला सुना तो नई परंपरा शुरू…

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द होने को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा कि अगर उनकी याचिका सुनी जाती है तो यह अनुच्छेद 329 के परे होगा. इससे एक नई परंपरा शुरू होगी कि नामांकन खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई कर सकता है.

संविधान के अनुच्छेद 329 में यह व्यवस्था है कि चुनावी मामलों में कोर्ट अंतरिम चरण में हस्तक्षेप नहीं करता. इसी अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद असंतुष्ट उम्मीदवार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. संविधान में इकलौती व्यवस्था दी गई है कि हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की जाए.

मीनाक्षी नजराजन ने बुधवार (10 जून, 2026) को देर रात याचिका दाखिल करके नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के विचार योग्य होने पर सवाल उठाए, लेकिन मीनाक्षी नटराजन की अपील पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार हो गया. उन्होंने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए जाने पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने यह अपील स्वीकार नहीं की.

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर रद्द किया गया है कि उन्होंने तेलंगाना की एक अदालत में उनसे जुड़े एक आपराधिक मामले की जानकारी नॉमिनेशन में नहीं दी. इस पर उन्होंने दलील दी कि नामांकन पत्र में उसी केस की जानकारी देना जरूरी है, जिसमें आरोप तय हो चुका हो, लेकिन उनके मामले में सिर्फ नोटिस आया है. मीनाक्षी नटराजन का कहना है कि अगर उन पर चार्ज फ्रेम हुआ होता तो वह इसे नामांकन पत्र में जरूर लिखतीं, छुपाने का सवाल ही नहीं था?

मीनाक्षी नटराजन की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का नामांकन रद्द करने का आदेश मीनाक्षी नटराजन के प्रति पूर्ण अन्याय है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘हमें सुप्रीम कोर्ट का कोई पुराना फैसला दिखाइए जहां सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव नामांकन खारिज होने पर दखल दिया हो.’ इस पर अभिषेक सिंघवी ने कहा कि केस के तथ्यों के आधार पर निर्णय होना चाहिए.

अभिषेक मनु सिंघवी ने बीएनएसएस के सेक्शन 223 का हवाला देते हुए कहा कि नए अधिनियम में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि संज्ञान लेने से पहले संभावित आरोपी को सुना जाना चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि लेकिन कोर्ट ने समन तो भेजा था न. अभिषेक सिंघवी ने फिर कहा कि सिर्फ समन भेजा गया और रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के सेक्शन 33ए आरोप तय होने की बात करता है.

तेलंगाना के जिस मामले में मीनाक्षी नटराजन को नोटिस भेजा गया था, उसका जिक्र करते हुए अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट में कहा, ‘शिकायतकर्ता का कहना है कि 2022 में उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ.पार्टी ने शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन मीनाक्षी तो 2025 में राज्य में पार्टी की प्रभारी बनी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मैं देश की सबसे बड़ी अदालत में आ चुका था. फिर भी रिटर्निंग ऑफिसर ने राज्यसभा चुनाव का कल ही परिणाम घोषित कर दिया.’ मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख थी. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन उम्मीदवार ही मैदान में थे, इसलिए वह निर्विरोध चुनाव जीत गए. नाम वापस लेने की अवधि समाप्त होते ही परिणाम घोषित कर दिए गए थे.

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