US President Donald Tru

जानिए कौन है डॉ.एंथनी फाउची

विदेश

अमेरिका में जैसे-जैसे राष्ट्रपति चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है वैसे-वैसे अमेरिका में Coronavirus मुद्दा बनता जा रहा है। साथ ही उन लोगों को जिम्मेदार बताया जा रहा है जो इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे मगर नियमों और कानूनों का पालन नहीं करा पाए जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में नुकसान हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और उनके प्रतिद्धदी जो बाइडेन की तू-तू, मैं-मैं के बीच अब डॉ.एंथनी फाउची भी निशाने पर आ गए हैं।


दरअसल डॉ.फाउची को निशाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि वो अमेरिका में Corona को रोकने के अभियान का नेतृत्व कर रहे थे मगर Corona प्रसार को रोकने में बहुत अधिक कामयाबी नहीं मिल पाई। डॉ फाउची एक सम्मानित और लोकप्रिय डॉक्टर हैं। उनकी आलोचना को TRUMP के पार्टी के ही कुछ लोग बुरा मान रहे हैं। डॉ फाउची लोगों की गतिविधियों पर ज्यादा रोक लगाने और अर्थव्यवस्था को धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लाना चाहते हैं लेकिन TRUMP मानते हैं कि आर्थिक गतिविधियां रोकी गईं तो ज्यादा नुकसान होगा।

डॉ. एंथनी फाउची व्हाइट हाउस में Coronavirus पर बनी टास्क फोर्स के प्रमुख अधिकारी हैं। जब से Corona का प्रसार शुरू हुआ है उसके बाद से ही डॉ.फाउची कई बार Donald Trump के साथ स्टेज भी साझा करते देखे गए। व्हाइट हाउस में आयोजित की जाने वाली प्रेस कांफ्रेंस में भी कई बार वो Corona से संबंधित आंकड़ें देते देखे गए।

अपने एक बयान की वजह से डॉ.एंथनी अमेरिकियों के निशाने पर आ गए थे। उन्होंने कहा था कि अगर Covid-19 को रोकने के लिए पहले से कदम उठाए गए होते तो इतने लोगों की मौत नहीं होती। उनके इस बयान के बाद वो अमेरिका में कई लोगों के निशाने पर आ गए। इसके बाद ट्वीटर पर टाइम टू #FireFauci ट्रेंड करने लगा था। ट्रंप ने भी इस हैशटैग वाले एक ट्वीट को रीट्वीट करके ये स्पष्ट कर दिया कि वो फाउची की बात से सहमत नहीं हैं। डॉ फाउची अमेरिका की Coronavirus के ख़िलाफ़ लड़ाई का चेहरा बन गए हैं। दोनों कई मुद्दों पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग राय जाहिर करते रहे हैं।


डॉ फाउची अब तक छह राष्ट्रपतियों के सलाहकार रह चुके हैं। उन्होंने जॉर्ज डब्ल्यू बुश की अमेरिकी सरकार को अफ्रीका में एड्स इनिशिएटिव शुरू करने में मदद की थी। अब TRUMP के कार्यकाल में वो Covid-19 के आउटब्रेक के बीच जनता के लिए एक्सप्लेनर-इन-चीफ का काम कर रहे हैं। जब TRUMP ने दावा किया कि जल्द ही दवा बना ली जाएगी, तो उन्होंने उसे ठीक करते हुए कहा कि वैक्सीन बनने में कम से कम डेढ साल का वक्त लगेगा। एड्स से पीड़ित लोगों के प्रति उनकी सहानुभूति की तारीफ हुई, और उन्हें इस बात का भी श्रेय दिया गया कि उन्होंने रेगुलेटर्स को इस बात के लिए मनाया कि नई दवाइयों के लिए क्लीनिकल ट्रायल के प्रतिबंधों में ढील दी जाए।


अपने दृष्टिकोण की वजह से कई बार डॉ. फाउची निशाने पर आते रहे हैं। एक मेडिकल रिसर्चर के तौर पर अपने 5 दशक के करियर में एंथनी फाउची ने अपना पुतला जलते हुए देखा है। प्रदर्शनाकरियों के मुंह से खुद को “हत्यारा” कहते हुए सुना है। यहां तक कि उनके ऑफिस की खिड़की के बाहर स्मोक बम फेंकें गए। उन्हें एक ऐसे डॉक्टर के तौर पर देखा गया, जिन्होंने पब्लिक हेल्थ क्राइसिस का सामना करने के लिए अमेरिका की मदद की, नहीं तो ये और भी मुश्किल होता।

79 साल के डॉ फाउची पहली बार इस तरह की चुनौती का सामना नहीं कर रहे हैं। 1980 में एचआईवी/एड्स महामारी के दौरान वो नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ में इम्यूनोलॉजी के प्रमुख रहे थे। ब्रुकलीन में एक आप्रवासी इतालवी फार्मासिस्टों के परिवार में 1940 को क्रिसमस के दिन जन्मे डॉ फाउची ने 2002 में होली क्रॉस कॉलेज एलुमनी मैगजीन को बताया था, “मैं तबसे प्रिस्क्रिप्शन लिख रहा हूं, जबसे मेरी बाइक चलाने की उम्र हुई थी।” 1966 में वो कॉर्नेल मेडिकल स्कूल में फर्स्ट क्लास से ग्रेजुएट हुए थे।


1986 में पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग के बाद उन्होंने युद्ध के वक्त नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ज्वाइन कर लिया। वो बताते हैं कि दशकों बाद उनके करियर में टर्निंग प्वाइंट उस वक्त आया, जब 5 जून 1981 को उनके टेबल पर एक रिपोर्ट पहुंची। रिपोर्ट में लिखा था कि एक सेहतमंद मरीज की मौत अजीब निमोनिया की वजह से हुई, जो अक्सर कैंसर के मरीजों में देखने को मिलता है।


एक चिकित्सक के रूप में डॉ फाउची के इंसानी इम्यून सिस्टम पर किए काम को इस बात का श्रेय दिया जाता है जिससे ये पता लगाने में मदद मिली कि एचआईवी वायरस शरीर की लड़ने की क्षमता को कैसे नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने zidovudine और एड्स के इलाज के लिए पहले एंटीरेट्रोवाइरल ड्रग के क्लीनिकल ट्रायल को लीड किया। 1980 के दशक में ये अमेरिका में एक महामारी बन गई हलांकि वो कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गए जो तत्कालीन राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन के प्रशासन की चुप्पी और नोवल दवाइयां कम ही लोगों तक पहुंचने से नाराज थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *