कलम सत्याग्रह का बिहार से आगाज़

पटना के BIA हॉल में विभिन्न सामाजिक सरोकार के संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में ‘कलम सत्याग्रह’ नामक अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के बैनेर तले “ बिहार में शिक्षा की दिशा एवं दशा पर एक बहस का आयोजन किया गया। कलम सत्याग्रह की पृष्ठभूमि बताते हुए आरटीआई फोरम के अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार राय ने कहा कि बिहार के शिक्षा एवं मानव विकास से जुड़े विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रुप से बिहार में शिक्षा की बदहाली पर चिंता प्रकट करते हुए एक साथ नागरिक आंदोलन की परिकल्पना की है। सब का यह मानना है कि वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की स्थिति बहुत ही दयनीय है। नीति आयोग की रिपोर्ट में भी लगातार बिहार को निचले या नीचे से दूसरे स्थान पर दिखाया जा रहा है जोकि चिंता का विषय है। इन्हीं सब मुद्दों पर एकजुट होकर नागरिक आंदोलन की परिकल्पना के रूप में कलम सत्याग्रह की शुरुआत की गई है।

अपने स्वागत भाषण में कलम सत्याग्रह अभियान के संयोजक आनन्द माधव ने कहा कि आज जरूरत है की हम सब मिलकर कैसे रजनीतिक बहस में बदलाव लाएं। आज के नकारात्मक रजनीतिक बहस को एक सकारात्मक रुख की आवश्यकता है। इसीलिए कलम सत्यागृह मंच का जन्म हुआ है। यह अभियां बिहार के हर जिले में जाएगा, कोशिश ये रहेगी कि हर गाँव तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि बिहार में ना तो शिक्षा के अधिकार कानून का सही से अनुपालन हो पा रहा है और ना ही विश्वविद्यालयों में छात्रों और युवाओं को अच्छी व रोजगारपरक शिक्षा मिल पा रही है। चाहे आंगनबाड़ी हो या प्रारंभिक से लेकर हाईस्कूल तक हो या फिर यूनिवर्सिटी की शिक्षा हो कहीं भी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। हर जगह शिक्षकों की कमी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि विद्यालयों में 2,78,602 से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अमूमन यही स्थिति विश्वविद्यालयों की भी है। वहां तो एक तरह से और भी बदतर स्थिति है। ना हॉस्टल हैं न कॉलेज के भवन हैं और ना ही पुस्तकालय एवं लैब है। जर्जर हालत में उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

यू डाइस की रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी बच्चों में साक्षरता दर केवल 71.2% है जबकि दलितों में तो यह और भी कम मात्र 48.17% के आसपास है। दलित एवं महादलित बच्चों के विद्यालय छोड़ने का दर बहुत अधिक है। एक ओर सामाजिक विकास परिषद की रिपोर्ट कहती है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण वर्ष 2025 तक में बिहार में 60000 और प्राथमिक विद्यालयों की जरूरत होगी। वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 1885 प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर दिया है और 8231 विद्यालयों को बंद करने की फाइल अभी लंबित है। कलम सत्याग्रह का मूल उद्देश्य है कि शिक्षा सामाजिक विमर्श का विषय बने और आम जनमानस में शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता पैदा हो।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास जी ने बिहार में शिक्षा के बदहाली पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि “बच्चे पढेंगे तो बिहार बढ़ेगा”। बिहार जैसे अल्प विकसित राज्य के लिए शिक्षा पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। राष्ट्रीय स्तर पर जो पैमाना है उनके अनुसार बिहार शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी बहुत ही पिछड़ा हुआ है। उनकी लगातार कोशिश यही है बिहार में मुद्दों की आधारित राजनीति हो और बिहार में सबसे प्रमुख मुद्दे ही शिक्षा और स्वास्थ्य हैं। उन्होंने इस अभियान को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि जब भी और जैसी भी जरूरत होगी बिहार कांग्रेस इस अभियान के साथ खड़ा है।

शिक्षा पर वर्ल्ड बैंक ग्लोबल पूर्व सलाहकार सुजीथा बशीर ने शिक्षा को राष्ट्रीय ईमर्जन्सी बताया। वो ज़ूम के माध्यम से जुड़ी थीं। बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर अपनी प्रस्तुति देते हुए विभिन आयोगों में एवं संस्थाओं की रिपोर्ट के माध्यम से बिहार में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही अपने प्रस्तुतियों में उन्होंने शिक्षा की चुनौतियों से लड़ने के लिए आगे का रोडमैप पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पटना वुमेंस कॉलेज की प्रोफेसर उपासना सिंह ने नई शिक्षा नीति पर विस्तार से परक्ष डाला ओर कहा कि कैसे यह विपरीत दिशा में जा रहा है।

प्रदेश काँग्रेस प्रेसीडेंट डॉ मदन मोहन झ ने कहा कि बिहार काँग्रेस इस कलम सत्याग्रह के साथ खड़ा रहेगा। भोजन के अधिकार के बिहार के संयोजक रूपेश जी ने धन्यवाद ज्ञपन किया। डॉ मधुबाला ने मंच का संचालन किया। अन्य वक्ताओं में प्रमुख थे दलित अधिकार मंच के अध्यक्ष कपिलेश्वर राम, बिहार दलित विकास समिति के फादर जोसे, गालिब खान, सौरभ सिन्हा, विजय कान्त सिन्हा, अमित विक्रम, श्रीमती सुमन सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ के विजय कुमार सिंह आदि।

सभा के अंत में एक “कलम सत्याग्रह हस्ताक्षर अभियान” भी चलाया गया जिसमें उपस्थित सभी साथियों ने कलम सत्याग्रह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए हस्ताक्षर किए। आज के कार्यक्रम में प्रमुख तौर पर शिक्षा के अधिकार फोरम, सखी, दलित चेतना मंच, टीईटी शिक्षक संघ, आंगनवाड़ी सेविका संघ, आशा संघ, बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ, बिहार दलित विकास समिति, बिहार विकलांग मंच, दलित अधिकार मंच, एस पी एस डी सी, सहित दर्जनों संस्थाओं ने अपनी सहभागिता दी।

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