अमेरिका की मध्यस्थता में रोम में दो दिनों तक चली वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान ने दक्षिणी लेबनान में ‘पायलट जोन’ लागू करने की दिशा में अहम प्रगति की है। प्रस्तावित योजना के तहत इन क्षेत्रों से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी होगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेबनान की सेना को सौंपी जाएगी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों देशों ने पायलट जोन के ढांचे और उसके दिशा-निर्देशों पर सहमति बना ली है। अब इसे अंतिम रूप देकर जल्द लागू करने की तैयारी की जा रही है। जानिए, पायलट जोन क्या है और इससे लेबनान में शांति बहाल करने की क्या उम्मीदें हैं।
फिर क्यों शुरू हुई थी इजरायल-हिज्बुल्लाह की जंग?
हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई, जब लेबनान के सशस्त्र संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट हमले किए। यह घटनाक्रम ईरान पर इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के कुछ दिनों बाद सामने आया। जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में सैन्य अभियान चलाकर वहां अपनी मौजूदगी बढ़ा दी। इस बीच, हिज्बुल्लाह लगातार लेबनान और इजरायल के बीच किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता का विरोध करता रहा, हालांकि इससे बातचीत की प्रक्रिया पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
जून में ‘फ्रेमवर्क समझौते’ का हुआ ऐलान
हालांकि, रोम में हुई वार्ता के नतीजों पर न तो इजरायल और न ही लेबनान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। इससे पहले 26 जून को दोनों देशों ने एक ‘फ्रेमवर्क समझौते’ की घोषणा की थी। इस प्रस्ताव के तहत ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के हथियार छोड़ने की स्थिति में दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी का रोडमैप तैयार किया गया था।
लेबनानी आर्मी को अपने कब्जे वाले इलाके सौंपेगा इजरायल
प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में दक्षिणी लेबनान में दो ‘पायलट जोन’ स्थापित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों से इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेबनान की सेना को सौंपेगी। इसके बाद लेबनानी सेना इन इलाकों में हिज्बुल्लाह की मौजूदगी समाप्त करने की कार्रवाई करेगी। हालांकि, इस सप्ताह की वार्ता से पहले जमीनी स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया ठप पड़ गई थी।
दो पायलट जोन कहां होंगे, ये अभी नहीं हुआ तय
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन, जो 21 जुलाई को अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं, ने रोम वार्ता से पहले स्पष्ट किया था कि लेबनानी प्रतिनिधिमंडल को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी नई बातचीत से पहले दोनों प्रस्तावित पायलट जोन से इजरायली सेना की तत्काल वापसी की मांग की जाए। फिलहाल इन पायलट जोन के अंतिम स्थानों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, इजरायल और लेबनान के अधिकारियों ने पहले संकेत दिए थे कि घंदौरियेह, जवतार और फ्रौन जैसे दक्षिणी लेबनानी शहर इस योजना का हिस्सा हो सकते हैं।
लेबनान-इजरायल के बीच जोन के निर्धारण पर फंसी बात
हालांकि, प्रस्तावित पायलट जोन को लेकर भी मतभेद सामने आए। विवाद की वजह यह रही कि जिन क्षेत्रों को शुरुआती चरण के लिए चुना गया, उनमें से अधिकांश जगहों पर पहले से इजरायली सेना की तैनाती नहीं थी। ऐसे में सवाल उठने लगे कि जब वहां सैनिक मौजूद ही नहीं हैं, तो उनकी वापसी कैसे होगी। लेबनानी सेना का मानना था कि पायलट जोन का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि इसमें इजरायली नियंत्रण वाले अधिक क्षेत्र शामिल किए जा सकें।
हथियार छोड़ने के लिए राजी नहीं चरमपंथी गुट हिज्बुल्लाह
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पायलट जोन लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की आगे की वार्ताएं शुरू की जाएंगी, जिनका उद्देश्य इजरायल और लेबनान के बीच व्यापक समझौते का रास्ता तैयार करना है। हालांकि, इस पहल को लेकर चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हिज्बुल्लाह ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते को स्वीकार नहीं करेगा और अपने हथियार छोड़ने का उसका कोई इरादा नहीं है। दूसरी ओर, इजरायल के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि वे दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में लंबे समय तक अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की योजना पर कायम हैं।
लेबनान से इजरायल के हटने के पक्ष में हैं ट्रंप
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी संकेत दे चुके हैं कि इजरायल को लेबनान और दक्षिणी सीरिया से अपनी सेना हटाकर अन्य रणनीतिक मोर्चों पर तैनात करनी चाहिए। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका और इजरायल को अपनी सैन्य और कूटनीतिक ऊर्जा बड़ी चुनौतियों पर केंद्रित करनी चाहिए, जिनमें सबसे प्रमुख चुनौती ईरान है।
लेबनान में सीरियाई सेना का दखल चाहते हैं ट्रंप
हाल ही में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन और उससे पहले हुए G7 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात में हिज्बुल्लाह से निपटने के लिए लेबनान में सीरियाई सेना की तैनाती का सुझाव दोहराया। ट्रंप ने विश्वास जताया कि इस मामले में अल-शरा की भूमिका इजरायल की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
