उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टकराने वाला पाकिस्तानी नौसेना का जहाज PNS Hunain बताया जा रहा है। यह पाकिस्तान नौसेना का यारमूक-क्लास ऑफशोर पेट्रोल वेसल है। यह घटना उस समय हुई, जब PNS Hunain पाकिस्तान नौसेना के SEASPARK-2026 नामक नौसैनिक अभ्यास का हिस्सा था।
पाकिस्तान ने इस बड़े नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत 2 सितंबर को कराची से की थी। SEASPARK-2026 को दो चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें पहले पांच दिनों का Karachi Port Phase हुआ। इसके बाद अभ्यास का दो दिवसीय Sea Phase उत्तर अरब सागर में आयोजित किया गया।
कैसे टकराए भारत और पाकिस्तान के वॉरशिप
15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में व्यापक समुद्री गतिविधियों के बीच पाकिस्तान नौसेना का PNS Hunain भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत के काफी करीब पहुंच गया। भारतीय पक्ष के मुताबिक, पाकिस्तानी जहाज तेज रफ्तार में असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई।
इस हादसे में PNS Hunain को भारी नुकसान पहुंचा है। जहाज पर करीब 130 पाकिस्तानी नौसैनिक सवार बताए जा रहे हैं। टक्कर के बाद क्षतिग्रस्त पाकिस्तानी जहाज को वापस कराची हार्बर की ओर रवाना कर दिया गया। वहीं, भारतीय नौसेना के युद्धपोत को इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
घटना के बाद भारत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया और औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज की गतिविधि अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के Article 10 में तय प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। मंत्रालय ने इसे उक्त समझौते का सीधा उल्लंघन बताया है।
भारत पाकिस्तान के बीच क्या है समझौता
इस घटना के बाद 1991 के भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौते में सैन्य गतिविधियों को लेकर तय किए गए नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों को सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी गतिविधियों की पहले से जानकारी देने तथा ऐसी गतिविधियों के दौरान सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने का प्रावधान है।
इस तरह की एक घटना पहले भी सामने आ चुकी है। 16 जून 2011 को अदन की खाड़ी में पाकिस्तान के PNS Babur और भारतीय युद्धपोत INS Godavari के बीच टक्कर हुई थी। उस समय भी भारत ने घटना को लेकर पाकिस्तान के सामने अपना विरोध दर्ज कराया था।
भारत-पाकिस्तान के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य सैन्य अभ्यास और अन्य गतिविधियों के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच किसी संभावित खतरनाक स्थिति को रोकना है। इसमें सैन्य प्लेटफॉर्म की आवाजाही से जुड़े एहतियाती उपाय भी शामिल हैं, खासकर तब जब दोनों देशों के युद्धपोत या पनडुब्बियां एक-दूसरे के करीब हों।
दूरी को लेकर क्या हैं नियम
1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 में भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों तथा पनडुब्बियों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर खास प्रावधान किया गया है। इसके तहत दुर्घटना की आशंका को कम करने के लिए दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से तीन नॉटिकल मील से कम दूरी पर नहीं आना चाहिए।
यानी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक प्लेटफॉर्म के बीच कम से कम 3 नॉटिकल मील (NM) की दूरी बनाए रखने का प्रावधान है। तीन नॉटिकल मील की दूरी करीब 5.56 किलोमीटर होती है। इस नियम का उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य जहाजों और पनडुब्बियों के बीच संभावित दुर्घटना या खतरनाक स्थिति की आशंका को कम करना है।
दोनों देशों की नौसेनाओं में कब कब हुआ टकराव
•भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच पिछले कई दशकों में समुद्री क्षेत्र में तनावपूर्ण आमना-सामना और करीबी घटनाएं सामने आती रही हैं।
•Society for Policy Studies के Maritime Research Group की 2024 की एक रिपोर्ट में वर्ष 1995 की एक घटना का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, इंडोनेशिया में आयोजित International Fleet Review में शामिल भारतीय नौसेना के एक जहाज के ऊपर पाकिस्तान नौसेना के Alouette हेलीकॉप्टरों ने बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी थी।
•रिपोर्ट में 1996 की एक अन्य घटना का भी जिक्र है। अरब सागर में पाकिस्तान के Sea Spark नौसैनिक अभ्यास की निगरानी के दौरान पाकिस्तानी नौसेना के Alouette हेलीकॉप्टर और भारतीय नौसेना के Sea King हेलीकॉप्टर के बीच टक्कर की स्थिति बन गई थी, हालांकि दोनों विमान आपस में टकराने से बच गए।
ये घटनाएं बताती हैं कि जब दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से युद्ध ना भी हो रहा हो, तब भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र क्यों ज़रूरी हैं और समझौतों पर अमल करना कितना जरूरी है।
समुद्री नेविगेशन के नियम का पालन है जरूरी
नौसेना के युद्धपोत सामान्य कॉमर्शियल जहाजों की तुलना में अलग तरह के मिशन पर तैनात रहते हैं। ये जहाज निगरानी, गश्त, सैन्य अभ्यास और अन्य रणनीतिक अभियानों के लिए समुद्र में संचालित होते हैं। कई बार इनके रास्ते में अलग-अलग देशों के जहाज भी आ सकते हैं, ऐसे में सुरक्षित नेविगेशन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
समुद्र में जहाजों की टक्कर रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर COLREGs (International Regulations for Preventing Collisions at Sea) लागू हैं। ये नियम समुद्र में जहाजों की आवाजाही और एक-दूसरे से सुरक्षित तरीके से गुजरने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं तय करते हैं, ताकि टक्कर जैसी घटनाओं का जोखिम कम किया जा सके।
क्या हैं समुद्री नेविगेशन के नियम
•समुद्र में हर जहाज को लगातार निगरानी रखनी होती है। इसके लिए आंखों-कानों के साथ उपलब्ध तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर आसपास के जहाजों और संभावित खतरों पर नजर रखना जरूरी है।
•जहाजों को परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित गति से चलना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते दिशा बदली या जहाज को रोका जा सके।
•अगर किसी स्थिति में टक्कर की संभावना को लेकर संदेह हो, तो उसे टक्कर के जोखिम के तौर पर ही माना जाता है और उसी के मुताबिक सावधानी बरतनी चाहिए।
•रडार का इस्तेमाल करने वाले नाविकों को उसकी क्षमताओं और सीमाओं की जानकारी होना जरूरी है, ताकि उससे मिलने वाली जानकारी का सही आकलन किया जा सके।
•टक्कर से बचने के लिए की जाने वाली कार्रवाई समय पर, स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए, जिससे दूसरे जहाज को भी स्थिति समझने में आसानी हो।
•जब दो पावर से चलने वाले जहाज आमने-सामने आते हैं, तो दोनों को अपने Starboard यानी दाईं ओर दिशा बदलनी चाहिए, ताकि वे एक-दूसरे के बाईं तरफ से सुरक्षित रूप से गुजर सकें।
•अगर दो जहाजों के रास्ते एक-दूसरे को काट रहे हों, तो जिस जहाज की दाईं तरफ दूसरा जहाज मौजूद हो, उसे रास्ता देने की जिम्मेदारी होती है।
•ऐसे मामलों में एक जहाज Give-way vessel के तौर पर रास्ता छोड़ता है, जबकि दूसरे को अपनी गति और दिशा बनाए रखने की भूमिका होती है। हालांकि, अगर रास्ता देने वाला जहाज जरूरी कार्रवाई नहीं करता, तो दूसरे जहाज को भी टक्कर रोकने के लिए कदम उठाना होता है।

