जब किसी आरोपी को अदालत के आदेश पर जेल भेजा जाता है, तो इसे ज्यूडिशियल कस्टडी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्यूडिशियल कस्टडी कितने दिनों की होती है और इसकी अवधि कौन तय करता है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।
ज्यूडिशियल कस्टडी में आरोपी जेल प्रशासन की निगरानी में रहता है। पुलिस कस्टडी से यह अलग होती है, क्योंकि पुलिस कस्टडी में आरोपी पुलिस की हिरासत में रहता है, जबकि ज्यूडिशियल कस्टडी में वह जेल में रहता है।
इसकी अवधि हर मामले में एक जैसी नहीं होती। अदालत मामले की परिस्थितियों और जांच की जरूरत को देखते हुए हिरासत की अवधि तय करती है और जरूरत पड़ने पर उसे बढ़ा भी सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ज्यूडिशियल कस्टडी के लिए हर मामले में लागू होने वाली कोई एक निश्चित न्यूनतम अवधि नहीं है। कई मामलों में अदालत 14 दिन की अवधि का आदेश दे सकती है, लेकिन इसे सभी मामलों का अनिवार्य नियम समझना सही नहीं होगा।
आपराधिक प्रक्रिया में हिरासत से जुड़े नियम अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, यानी BNSS, 2023 की धारा 187 में दिए गए हैं। पुराने मामलों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए किसी आरोपी की कस्टडी कितने दिन रहेगी, यह अपराध, जांच और अदालत के आदेश पर निर्भर करता है।

