होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद बिल में खाने की कीमत और टैक्स के साथ 5 से 10 फीसदी तक सर्विस चार्ज भी जोड़ा जा सकता है। कई ग्राहक इसे अनिवार्य शुल्क समझकर बिना सवाल किए भुगतान कर देते हैं, जबकि ऐसा करना जरूरी नहीं है। उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियमों के मुताबिक, होटल और रेस्टोरेंट ग्राहकों पर जबरन सर्विस चार्ज नहीं लगा सकते। ऐसा करना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
सर्विस चार्ज कब नहीं वसूल सकते होटल?
CCPA (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, होटल और रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिल में सर्विस चार्ज को अपने आप नहीं जोड़ सकते और न ही इसे अनिवार्य बताकर भुगतान के लिए दबाव बना सकते हैं। किसी अन्य नाम से सर्विस चार्ज वसूलना भी नियमों के विरुद्ध है। अगर कोई ग्राहक यह शुल्क देने से मना करता है, तो होटल या रेस्टोरेंट उसे प्रवेश देने या सेवा उपलब्ध कराने से इनकार नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए, यदि बिल में 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज जोड़ा गया है, तो ग्राहक इसे हटाने की मांग कर सकता है।
किन चीजों का चार्ज ले सकते हैं होटल?
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि होटल ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते। होटल और रेस्टोरेंट अपने कमरे, खाने-पीने की चीजों की कीमत तय करने के लिए स्वतंत्र हैं और ग्राहकों को मेन्यू में दर्ज दरों के अनुसार भुगतान करना होता है। इसके अलावा, नियमों के तहत लागू GST और अन्य वैध टैक्स भी बिल में शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, अगर ग्राहक कोई अतिरिक्त सुविधा या अलग से बुक की गई सेवा लेता है, तो उसकी कीमत और उससे जुड़ी शर्तों की जानकारी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए।
टिप देना जरूरी है या नहीं?
सर्विस चार्ज और टिप के बीच का अंतर समझना भी जरूरी है। टिप पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करती है, जिसे वह सेवा के अनुभव के आधार पर अपनी इच्छा से दे सकता है। रेस्टोरेंट या होटल इसके लिए ग्राहक पर दबाव नहीं बना सकते। इसी तरह, सर्विस चार्ज को भी अनिवार्य बताकर ग्राहक से जबरन वसूलना नियमों के खिलाफ है।

