कांग्रेस सांसद राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि CORONA संकट से निपटने में उसका रवैया ‘असंवेदनशील और अमानवीय’ है। आज उन्होंने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (DA) काटे जाने के फैसले का हवाला देकर यह आरोप दुहराया है। राहुल ने केंद्र पर Lockdown में मजदूरों और असहाय आबादी का ख्याल नहीं रखने का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी ने DA रोके जाने पर ट्वीट किया, ‘लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और केंद्रीय विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता (DA)काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है।’
राहुल गांधी के आरोपों को कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के बयान से अच्छी तरह समझा जा सकता है। सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव को मानते हुए केंद्र सरकार अपने फिजूल खर्चे पर रोक लगाकर ढाई लाख करोड़ रुपये बचा सकती है जिसका इस्तेमाल संकट के इस समय में लोगों की मदद के लिए हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘Coronavirus महामारी के संकट से पैदा हुई आर्थिक मंदी और आय की तंगी पर मरहम लगाने के बजाय मोदी सरकार जले पर नमक छिड़कने में लगी है।’ सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘उसने हाल ही में 30 लाख 42 हजार करोड़ रुपये का बजट पारित किया। बजट में आय एवं खर्चे का लेखा-जोखा स्पष्ट तौर से दिया जाता है। फिर बजट पेश करने के 30 दिन के अंदर ही मोदी सरकार सेना के जवानों, सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते पर कैंची चलाकर क्या साबित कर रही है?’
उन्होंने दावा किया कि महंगाई भत्ते में ‘अन्यायपूर्ण कटौती’ से लगभग 1.13 लाख सैनिकों, कर्मचारियों और पेंशनरों की तनख्वाह से सालाना 37,530 करोड़ रुपये की कटौती होगी। सुरजेवाला ने कहा, ‘दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि मोदी सरकार द्वारा महंगाई भत्ते की कटौती कर जख्म देने की इस कवायद ने देश की रक्षा करने वाले तीनों सेनाओं के हमारे सैनिकों तक को नहीं बख्शा। इस कटौती के जरिए सेनाओं के 15 लाख सैनिकों और लगभग 26 लाख सैन्य पेंशनभोगियों के 11 हजार करोड़ रुपये काट लिये जाएंगे।’

