27 SEPTEMBER Bharat Band

किसान आंदोलनः 27 सितंबर को किसानों का भारत बंद, बैंक यूनियन ने दिया समर्थन

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सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ तकरीबन 10 महीने से आंदोलन कर रहे किसानों ने आगामी 27 सितंबर को भारत बंद करने का ऐलान किया है. संयुक्त किसाना मोर्चा की ओर से कराए जा रहे भारत बंद में देश की कई राजनीतिक पार्टियों समेत करीब सौ संगठनों के भी शामिल होने की उम्मीद की जा रही है.

किसान संगठनों की ओर से दावा किया जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुलाए गए भारत बंद में देश की कई राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां, ट्रेड यूनियन, किसान संघ, युवा संगठन, छात्र संगठन, शिक्षक संघ, मजदूर संगठन समेत करीब 100 संगठन शामिल होंगे. संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत बंद में कई किसान संगठनों के साथ-साथ कर्मचारी संघों, कारोबारी संघों, कर्मचारियों और छात्र संगठनों, महिला संगठनों, ट्रांसपोर्टर संगठनों को शामिल किया जा रहा है.

मोर्चा ने कहा कि बंद के दौरान आयोजित रैली में अधिक लोगों को शामिल करने के लिए किसान महापंचायत आयोजित की जा रही है और साइकिल एवं मोटर साइकिल रैली का भी आयोजन किया जाएगा. केंद्र सरकार की ओर से पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को 300 दिन पूरे होने के मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि यह आंदोलन देश के लाखों किसानों की इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के बल पर टिका हुआ है और यह आगे भी जारी रहेगा.

इस महीने की शुरुआत में जारी एनएसएस भूमि और परिवारों के पास पशुधन और कृषि परिवारों की स्थिति आकलन, 2018-19 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, संघ ने कहा कि ऐसा लगता है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सरकार का लक्ष्य, दूर का सपना लगता है. प्रति कृषि परिवार का औसत बकाया ऋण वर्ष 2018 में बढ़कर 74,121 रुपये हो गया, जो वर्ष 2013 में 47,000 रुपये था. कृषि परिवारों का बढ़ता कर्ज, गहराते कृषि संकट को दर्शाता है.

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर के ‘भारत बंद’ के लिए दिशानिर्देश जारी किए है. संगठन ने कहा कि भारत बंद शांतिपूर्ण होगा और किसान ये सुनिश्चित करेंगे कि जनता को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े. एसकेएम ने एक बयान में कहा कि बंद सुबह छह बजे से शुरू होगा और शाम चार बजे तक जारी रहेगा. इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, बाजारों, दुकानों, कारखानों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. बयान में कहा गया है कि सार्वजनिक और निजी परिवहन की अनुमति नहीं दी जाएगी. किसी भी सार्वजनिक समारोह की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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