Delhi Pollution: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर एक्शन में केंद्र सरकार, बुलाई गई इमरजेंसी बैठक, हो सकता है बड़ा ऐलान

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राजधानी दिल्ली की हवा का जहरीलापन कम नहीं हो रहा है. पिछले करीब एक पखवाड़े से दिल्ली की हवा खराब है, जिसका असर आज भी देखने को मिला. राजधानी के आधा दर्जन से ज्यादा इलाकों की हवा की गुणवत्ता यानी AQI अब भी 400 के ऊपर बनी हुई है. आनंद विहार, द्वारका, पटपड़गंज, वजीरपुर समेत कई इलाकों में आज सुबह 9 बजे AQI का स्तर 400 से अधिक रहा. वहीं चांदनी चौक, आईटीओ, लोधी रोड जैसे इलाकों में भी यह 300 से 400 के बीच में बना हुआ है. दिल्ली में प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है. दिल्ली की दमघोंटू हवा के कारण बच्चों में सांस फूलने की समस्या आ रही है.

पराली जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारण दिल्ली में बच्चे बीमार पड़ने लगे हैं. आज सुबह लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में एक महिला अपनी 3 साल की बेटी के साथ पहुंची. इस बच्ची को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. महिला ने बताया कि पिछले कई दिनों से ऐसी परेशानी के बाद वह बेटी को डॉक्टर के पास लाई हैं. इधर, प्रदूषण पर नजर रखने वाली संस्थाओं ने भी अपने ताजा शोध के आधार पर दिल्ली की हवा को बच्चों के लिए खतरनाक बताया है.

दिल्ली की बिगड़ी आबोहवा और बढ़ते प्रदूषण (Delhi Pollution) को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है. प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने इमरजेंसी बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कुछ बड़े फैसलों का ऐलान हो सकता है. इस बैठक का आयोजन वर्चुअल तरीके से किया जा रहा है. केंद्रीय अधिकारियों ने पर्यावरण भवन से बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया. पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली की हवा दमघोंटू होती जा रही है. चारों ओर धूएं की एक मोटी परत को बिछे हुए देखा जा सकता है. लोगों ने सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत भी की है.

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह प्रदूषण संकट पर आपात बैठक बुलाए और स्थिति से निपटने के लिए मंगलवार तक गैर जरूरी निर्माण, परिवहन, ऊर्जा संयंत्रों पर रोक लगाने तथा कर्मियों को घर से काम करने देने जैसे कदमों पर निर्णय करे. इसने कहा कि तथ्य अब सामने आ गया है और किसानों द्वारा पराली जलाए जाने पर किसी वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार के बिना ही ‘हल्ला’ मचाया जा रहा है.

केंद्र को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के संबंधित सचिवों के साथ बैठक करने का आदेश देते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा, ‘वास्तव में, अब तथ्य सामने आ गया है, प्रदूषण में किसानों के पराली जलाने का योगदान चार प्रतिशत है… इसलिए, हम कुछ ऐसा लक्षित कर रहे हैं जिसका कोई महत्व नहीं है.’

दिल्ली में प्रदूषण पर पर्यावरण राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने टीवी9 भारतवर्ष से बात करते हुए कहा, ‘आज एक गंभीर बैठक हो रही है. हम लोग वायु प्रदूषण को लगातार निगरानी कर रहे हैं. कोर्ट की जो चिंता है, भारत सरकार पहले से ही उस मुद्दे पर चिंतित हैं. राज्यों के साथ समन्वय स्थापित की जा रही है, ताकि दिल्ली के करोड़ो लोगों को कैसे राहत मिल सकती है.’

उन्होंने कहा, ‘महज पराली से ही प्रदूषण जैसी कोई बात नहीं है. अपने दोष को छुपाने के लिए अपना दोष छुपाओ ये अच्छी बात नहीं. केवल पराली दोषी नहीं हालांकि, हम उसको लेकर गंभीर है कि उस समस्या को कैसे दूर करें. प्रदूषण के और भी जो कारण है, उसका समाधान कैसे कर सकते हैं. इस पर हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं.’

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अदालत ने संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम न उठाने की जिम्मेदारी नगर निकायों पर थोपने और ‘बहानेबाजी’ बनाने को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की. पीठ ने कहा कि निर्माण, उद्योग, परिवहन, बिजली और वाहन यातायात प्रदूषण पैदा करने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं तथा केंद्र को इन कारकों के संबंध में कदम उठाने चाहिए. इसने कहा, ‘हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा कुछ निर्णय लिए गए, लेकिन इसने यह स्पष्ट रूप से संकेत नहीं दिया है कि वे वायु प्रदूषण पैदा करने वाले कारकों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाने जा रहे हैं.’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘इसके मद्देनजर, हम भारत सरकार को कल एक आपातकालीन बैठक बुलाने और उन क्षेत्रों पर चर्चा करने का निर्देश देते हैं जिनका हमने संकेत दिया था और वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए वे कौन से आदेश पारित कर सकते हैं.’ पीठ ने कहा, ‘जहां तक ​​पराली जलाने का सवाल है, मोटे तौर पर हलफनामे में कहा गया है कि उसका योगदान दो महीने की अवधि को छोड़कर इतना अधिक नहीं है. हालांकि, वर्तमान में हरियाणा और पंजाब में काफी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं हो रही हैं. किसानों से आग्रह है कि दो सप्ताह तक पराली न जलाएं.’

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