रेलवे पर कोरोना महामारी का असर, यात्री किराये से होने वाले मुनाफे में 40,000 करोड़ का नुकसान

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कोरोना महामारी ने जहां दुनियाभर में कह तरह की गतिविधि पर ब्रेक लगा दिया है। जिसकी वजह से पूरी दुनियां की अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखा जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस साल मार्च के महीने से ही कोरोना संक्रमण को कम करने के लिए रेलवे समेत सभी करह के यातायात बंद हैं। जिसका असर अब रेलवे पर पड़ने लगा है। इस साल अभी तक यात्रियों से मिलने वाली धन राशि में 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा पिछले साल की तुलना में रेलवे मालढुलाई में 18 प्रतिशत की कमी आई है।

वहीं भारतीय रेलवे ने कोरोना महामारी की वजह से इस साल की सारी योजनाओं पर रोक लगा दी है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए मंजूर बुनियादी ढांचे से जुड़ी नई विकास कार्यों फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है। रेलवे बोर्ड की ओर से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने देश में कोरोना संकट के मद्देनजर इस साल 500 करोड़ रुपये तक की सभी नई योजनाओं मार्च, 2021 तक स्थगित रहेंगी। इसके अलावा ये भी कहा गया है कि 2019-20 तक मंजूर ऐसे कार्येां को, जिनमें विशेष प्रगति नहीं हुई है, अगले आदेश तक रोक दिया जाए।

रेलवे बोर्ड की ओर से इस बाबत 28 जुलाई को एक आदेश जारी किया गया था जिसके अनुसार पहले के मंजूर किए गए ऐसे सभी कार्यों को भी रोक देने को कहा गया है जिनमें मामूली या बिल्कुल भी प्रगति नहीं हुई है। आदेश में कहा गया है कि नए कार्य-पिंक बुक 2020-21 में शामिल कार्यों को रोक दिया जाए। हालांकि, ऐसे कार्य जो ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन की दृष्टि से जरूरी हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता हैं। ऐसे कार्यों की अनिवार्यता की समीक्षा संबंधित अतिरिक्त सदस्य, अतिरिक्त सदस्य-कार्य और अतिरिक्त सदस्य-राजस्व के जरिए की जाएगी।

इसके अलावा रेलवे ने जोनल रेलवे और उसकी सभी उत्पादन इकाइयों से कहा है कि वो नया कार्य तभी आगे बढ़ाएं जबकि ट्रेनों के परिचालन की सुरक्षा की दृष्टि से वो कार्य बहुत जरूरी हो। वहीं नए कार्य को शुरू करने से पहले जोनल रेलवे को वित्त मंत्रालय की मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद ही नई योजनाओं पर काम शुरू किया जा सकेगा।

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