करवा चौथ के मौके पर दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज बदलने की आशंका ने व्रत रखने वाली महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर मौसम में बदलाव और बारिश की संभावनाओं की चर्चा हो रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करवा चौथ की रात चांद देखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा?
करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर व्रत रखने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के साथ अपना व्रत खोलती हैं। लेकिन आसमान में बादल छाए रहने या बारिश होने की स्थिति में चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में चक्रवात ‘अर्नब’ का सीधा असर होने और बारिश के अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, बादलों की मोटी परत होने पर चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है। हालांकि, चंद्रोदय का निर्धारित समय और चांद का दिखाई देना दो अलग बातें हैं।
ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को सलाह है कि वे अपने शहर का चंद्रोदय समय और मौसम विभाग का ताजा अपडेट जरूर देखें।
करवा चौथ का चांद कितने बजे निकलेगा 2026
पंचांग अनुसार करवा चौथ का चांद रात 8 बजकर 17 मिनट तक दिखाई देने की उम्मीद है। लेकिन अलग-अलग शहरों की भौगोलिक स्थिति के कारण चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर देखने को मिल सकता है। चलिए जानते हैं किसी शहर में चांद का दीदार किस समय होने की संभावना है:
| शहर का नाम | चांद निकलने का संभावित समय |
| दिल्ली | रात 8 बजकर 17 मिनट पर |
| नोएडा | रात 8 बजकर 16 मिनट पर |
| गाजियाबाद | रात 8 बजकर 16 मिनट पर |
| लखनऊ | रात 8 बजकर 06 मिनट पर |
| कानपुर | रात 8 बजकर 10 मिनट पर |
| मुंबई | रात 9 बजे पर |
| कोलकाता | रात 7 बजकर 47 मिनट पर |
| हैदराबाद | रात 8 बजकर 41 मिनट पर |
| बेंगलुरु | रात 8 बजकर 55 मिनट पर |
| पटना | रात 7 बजकर 52 मिनट पर |
चंद्रमा को अर्घ्य देने और व्रत खोलने का सही नियम
- चंद्रोदय से कुछ समय पहले ही अपनी पूजा थाली तैयार कर लें।
- थाली में जल से भरा लोटा या करवा, रोली, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई, अपने पीने के लिए जल और छलनी अवश्य रखें।
- चांद निकलने पर सबसे पहले छलनी में दीपक जलाकर उसके जरिए चंद्रमा का दर्शन करें।
- फिर लोटे से चंद्रमा को जल अर्पित करें और फिर चंद्र देव की आरती उतारें।
- चंद्रमा को अक्षत, फूल, रोली अर्पित करते हुए मिठाई का भोग लगाएं।
- फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें और उनका आशीर्वाद लें।
- अंत में पतिदेव के हाथों से जल ग्रहण करके और मिठाई खाकर अपना निर्जला उपवास पूरा करें।
- इसके बाद अपने घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।

