मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य पद नियम-परंपरा से तय होता है, कोई भी स्वयं को यह नहीं लिख सकता। योगी ने जोर दिया कि मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए सपा पर लोगों को गुमराह करने और धार्मिक स्थलों के विकास का विरोध करने का आरोप लगाया।

