नीट पेपर लीक मामले को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार से आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन 26 दिन के बाद खत्म कर दिया है. इससे पहले CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके सोनम वांगचुक से अपील की थी वह भूख हड़ताल तोड़ दें. इन सब के बीच दीपके अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए.
एक इंटरव्यू में CJP के प्रवक्ता दीपक बालियान ने कहा है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. उन्होंने कहा कि यह छात्रों का पहला और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है. दीपक बालियान के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही जवाबदेही और जिम्मेदारी तय की जा सकती है. उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में हुई कथित नाकामियों की वजह से 20 छात्रों की जान चली गई. उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र सुबह से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और वे काफी नाराज, परेशान और निराश हैं.
सोनम वांगचुक के बारे में क्या कहा?
दीपक बालियान ने कहा कि कई छात्र और उनके परिवार पढ़ाई के लिए कर्ज लेते हैं. छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा के पेपर लीक हो जाते हैं तो उनकी मेहनत पर असर पड़ता है. इससे छात्रों को मानसिक रूप से काफी परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि छात्र चाहते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जा सकें. उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए था. उनका आरोप है कि उन्हें पर्दे के पीछे छिपाकर ले जाया गया, जो सही नहीं था.
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र
दीपक बालियान ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री इस मामले पर कुछ बोलेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी और दोषियों को जल्द सजा दी जाएगी. बालियान ने कहा कि अगर सरकार ऐसा करने के लिए तैयार है, तो फिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि उनका सवाल यह है कि जब सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, तो शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर बात करने से क्यों बच रही है. CJP का कहना है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.

