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गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आने वाले हैं चीनी राष्ट्रपति,भारत ने भेजा है निमंत्रण

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के भारत में ब्रिक्स समिट में शामिल होने की संभावना है, क्योंकि चीन ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का समर्थन किया है। ब्रिक्स समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली है। शी जिनपिंग के भारत दौरे के बारे में अभी आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार है। भारत पहले ही चीनी राष्ट्रपति को समिट के लिए न्योता भेज चुका है।

जिनपिंग का ऐतिहासिक दौरा

अगर शी जिनपिंग का भारत दौरा होता है, तो यह एक अहम और ऐतिहासिक दौरा होगा क्योंकि गलवान झड़प और लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सैन्य गतिरोध के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। अगर यह दौरा योजना के मुताबिक होता है, तो अक्टूबर 2019 के बाद शी जिनपिंग की यह भारत की पहली यात्रा होगी।

जिनपिंग की पिछली यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक समिट के लिए हुई थी। वुहान समिट के बाद दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी अनौपचारिक समिट थी। हालांकि, उस दौरे के करीब छह महीने बाद, LAC के लद्दाख सेक्टर में चीनी सेना की घुसपैठ के कारण भारत-चीन संबंध पिछले छह दशकों में सबसे निचले स्तर पर आ गए, जिससे लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा।

2014 में भारत दौरे पर आए थे जिनपिंग

इससे पहले शी जिनपिंग सितंबर 2014 में राजकीय दौरे पर भारत आए थे, जब उन्होंने अहमदाबाद और नई दिल्ली की यात्रा की थी। 2019 के बाद से शी ने भारत का दौरा नहीं किया है, हालांकि दोनों नेता ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों के दौरान मिलते रहे हैं।

पिछले साल चीन गए थे पीएम मोदी
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2025 तक तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन गए थे। लगभग सात वर्षों में पीएम मोदी की भी चीन की पहली यात्रा थी। इससे पहले, मोदी ने 2018 में वुहान अनौपचारिक शिखर सम्मेलन और 2019 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा किया था।

रूस में जिनपिंग से मिले थे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पिछली द्विपक्षीय बैठक अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में हुई थी। यह बैठक LAC पर सैन्य गतिरोध को सुलझाने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के कुछ ही समय बाद हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में अगस्त में तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत हुई थी।

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